तो श्रीमान आप अपने बच्चों के लिए भी ले जाएं!Updated: Sat, 25 Jan 2014 10:41 AM (IST)

अगर दिखाना ही है तो लोगों के प्रति परोपकारी रहो ताकि आपका यश चारों दिशाओं में गूंजे।

गिरीशचंद्र घोष बांग्ला के प्रसिद्ध कवि-नाटककार थे। उनके एक धनी मित्र थे। वह अपनी रईसी अपने व्यवहार में भी दिखाते थे। जैसे ही वह कहीं जाते तो उनका नौकर उनके लिए चांदी के बर्तन साथ लेकर चलता था ताकि वह अपना खाना उसी में खाएं।

घोष जी को यह बात अच्छी नहीं लगती थी पर वह मित्र का दिल नहीं दुखाना चाहते थे। तब उन्होंने तय किया कि वह उसकी आदतों को सुधार कर रहेंगे।

एक दिन घोष जी ने अपने रईस दोस्त को खाने पर आमंत्रित किया। हमेशा की तरह उनके मित्र अपने नौकर के साथ पहुंचे। नौकर बर्तन लेकर आया था। लेकिन घोष जी अपने मित्र के आते ही उन्हें और लोगों के बीच ले गए। जब तक मित्र कुछ समझ पाते तब तक उनके सामने पत्तल में खाना परोस दिया। बाकी लोगों के सामने भी पत्तल में खाना रखा था।

तब उनके रईस मित्र संकोच में पड़ गए। उन्होंने नौकर को आवाज देना चाहा लेकिन तब तक सब लोग खाने लगे और उनसे भी खाने का अनुरोध करने लगे। बेचारे को उनके साथ पत्तल में खाना पड़ा। खाने के बाद जैसे ही वे उठे, तो घोष जी उनके बर्तनों में व्यंजन लेकर उनके सामने हाजिर हुए।

उन्होंने हंसते हुए मित्र से कहा- क्षमा करें थोड़ी गलतफहमी हो गई। जब तुम्हारे नौकर को घर की महिलाओं ने बर्तन लेकर आते देखा तो उन्हें लगा कि शायद तुम अपने बच्चों के लिए खाना ले जाना चाहते हो। उन्होंने इसमें खाना दे दिया है। मित्र लज्जित होकर चले गए। उन्हें गलती का अहसास हो गया। उन्होंने प्रदर्शन करना छोड़ दिया।

संक्षेप में

धन का दिखावा बहुत ही निम्म श्रेणी के लोग करते हैं। भले ही वह धन का दिखावा कर स्वयं संतुष्ठ हो जाते है पर समाज उन्हें इस तुच्छ बात के लिए नकार देता है। जैसा की गिरीशचंद्र घोष जी के धनवान मित्र के साथ हुआ। अगर दिखाना ही है तो लोगों के प्रति परोपकारी रहो ताकि आपका यश चारों तरफ गूंजे।

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