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ऐसे शुरू हुई थी शनिदेव को तेल अर्पित करने की परंपराUpdated: Wed, 24 May 2017 03:52 PM (IST)

और इस दिन शनिदेव पर तेल चढ़ाने से जल्द आपकी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

ज्योतिष के अनुसार जब किसी पर शनि का संकट छाता है, तो वह शनि देव की आराधना में मगन हो जाता है। वह शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए हर संभव प्रयास करता है।

शनिवार को शनिदेव की विशेष पूजा अर्चना करता है। लेकिन लोगों का मानना है कि शनिदेव के चरणों में तेल अर्पित करने से वह जल्द प्रसन्न हो जाते हैं। किंतु शनिदेव को तेल अर्पित करने की परंपरा की शुरुआत कैसे हुई। यह बहुत कम लोग जानते हैं।

इस बारे में हिंदू पौराणिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है। जिसमें पहली कथा के अनुसार...

- एक बार रावण घमंड में चूर हो गया और उसने सभी ग्रहों को बंदी बना लिया।

- शनिदेव को उसने बंदीग्रह में उलटा लटका दिया, उसी समय हनुमानजी प्रभु राम के दूत बनकर लंका आए हुए थे।

- रावण ने हनुमानजी की पूंछ में आग लगवा दी। तब उन्होंने पूरी लंका जला दी।

- तब सारे ग्रह मुक्त हो गए लेकिन शनिदेव उल्टा लटके हुए थे। आग से वह काफी झुलस गए थे। तब हनुमानजी ने उनके शरीर पर तेल लगा दिया। जिससे वह दर्द मुक्त हो गए। और तभी से शनिदेव को तेल अर्पित करने की परंपरा शुरु हुई।

तभी से शनिदेव को तेल चढ़ाने की परंपरा की शुरुआत हुई और शनिवार का दिन शनिदेव का दिन होता है और इस दिन शनिदेव पर तेल चढ़ाने से जल्द आपकी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

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