शनिदेव की देन है ये रोग, इलाज के साथ करें शनि पूजाUpdated: Thu, 25 May 2017 09:42 AM (IST)

इसके उपचार के लिए झाड़-फूंक, गंडे-ताबीज आदि का उपयोग होता था।

उन्माद नाम का रोग शनि की देन है। इस रोग में रोगी की सोचने-समझने और विचार करने की क्षमता खत्म हो जाती है। उन्माद का अंग्रेजी में मेनिया कहते हैं। इस रोग से पीड़ित रोगी की भावनाओं कुछ समय के लिए असामान्य हो जाते है।

दरअसल, यह रोग ऐसे व्यक्तियों को होता है, जिनमें मानसिक दुर्बलता होती है। प्राचीन तथा मध्यकालीन युग में इस रोग का कारण भूत-प्रेत माना जाता था।

इस रोग के उपचार के लिए झाड़-फूंक, गंडे-ताबीज आदि का उपयोग होता था। आधुनिक काल में शारकों, जैने, मॉटर्न प्रिंस और फ्रॉयड इत्यादि मनोवैज्ञानिकों ने इसका कारण मानसिक बतलाया है।

ठीक इसी तरह वात रोग भी शनिदेव की ही देन है। जिसमें बिना कुछ खाए-पीए कोई व्यक्ति मोटापा का शिकार हो जाता है। इसके अलावा भगंदर रोग, फोड़े-फुंसी, पेट संबंधी रोग, स्नायु रोग और एसटीडी रोग भी शनि देव की नाराजगी के कारण ही होते हैं।

सिर की पीडा होना, विचार करते ही मूर्छा आना,मिर्गी, हिस्टीरिया, उत्तेजना शनि देव के नाराज होने के कारण ही होते हैं।

रोग को दूर करने का ज्योतिषीय उपाय

- शनि देव के बीज मंत्र का जप जातक से करवाया जाएं।

- उडद जो शनि का प्रिय अनाज है, उसकी दाल का प्रयोग करवाया खाने में उपयोग में लाएं।,

- चने का प्रयोग करें। लोहे के बर्तन में खाना खाएं। उन्माद रोग से मुक्ति मिलेगी।

नोटः यह ज्योतिषीय उपाय हैं। लेकिन डॉक्टरी इलाज जरूर करवाना चाहिए।

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