तो क्या स्वामी विवेकानंद को हुए थे मां काली के दर्शनUpdated: Fri, 31 Mar 2017 10:19 AM (IST)

हालांकि यह किंवदंती कितनी सच है। इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं।

यह बात है सितंबर, 1899 की जब स्वामी विवेकानंद कश्मीर में अमरनाथ जी के दर्शन के बाद श्रीनगर के क्षीर भवानी मंदिर में पहुंचे थे। वहां उन्होंने मां काली का स्मरण ध्यान के जरिए किया। यह समय नवरात्र का समय था। क्षीर भवानी में मंदिर में उन्होंने लगभग एक सप्ताह तक ध्यान किया।

जब ध्यान पूरा हो जाता था तो वह, मंदिर में आने वाले देवी भक्तों को प्रवचन देते थे। वह कहते थे कि, 'मां काली सृष्टि और विनाश, जीवन-मृत्यु, भले और बुरे, सुख और दुख से युक्त संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रतिनिधित्व करती हैं। उनके शरीर का वर्ण काला है। और वह बहुत ही विशेष व्यक्तियों को दर्शन देती हैं।

स्वामी जी अमूमन प्रवचनों में कहते थे कि उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस ने मृत्यु से पूर्व कहा था, नरेन्द्र, मां काली तेरा पग-पग पर साक्षात मार्गदर्शन करती रहेंगी।

कहते हैं जीवन के अंतिम दिनों में स्वामी विवेकानंद जी जिधर भी जाते, उन्हें मां काली की उपस्थिति का बोध होता था।

हालांकि यह किंवदंती कितनी सच है। इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं, लेकिन स्वामी जी बात को गंभीरता से लिया जाए... तो सवाल वही है कि तो क्या स्वामी विवेकानंद जी को मां काली के दर्शन हुए थे?

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