आलोचना से पहले दूसरों को समझें, नहीं होंगे कभी परेशानUpdated: Sat, 15 Jul 2017 04:39 PM (IST)

बहुत जल्दी दूसरों की आलोचना या उन पर नाराजी जाहिर करना ठीक नहीं है।

- संत राजिन्दर सिंह

दूसरों के साथ पेश आते हुए हमें धैर्य और उन्हें समझने की जरूरत है। बहुत जल्दी दूसरों की आलोचना या उन पर नाराजी जाहिर करना ठीक नहीं है।

यह अक्सर होता है कि हम दूसरों की स्थितियों को जाने बिना टिप्पणी देने लगते हैं। हम लोगों की बातचीत में भी इसे देखते हैं कि वे किसी तीसरे की आलोचना करने में बहुत व्यस्त दिखते हैं। हर किसी को लगता है कि चीजों को देखने का उसका नजरिया ही सही है। उसका आकलन ही सबसे उपयुक्त है।

ऑस्ट्रेलिया के खोजी डेविड एजवर्थ के साथ घटी ऐसी ही एक सच्ची घटना है। अपने साथी अर्नेस्ट शेकलेटन के साथ 1907-1909 के बीच दक्षिणी ध्रुव के मिशन पर गए। दक्षिणी ध्रुव की यह यात्रा बहुत कठिन और दुर्गम थी। एक दिन एजवर्थ का सहायक अपने टेंट के भीतर काम कर रहा था। अचानक उसे बहुत घुटी हुई आवाज बाहर से सुनाई दी। उसने कान लगाकर सुनने की कोशिश की पर कुछ भी स्पष्ट नहीं हो रहा था। बहुत कोशिश करके सुनने पर उसे मालूम हुआ कि वह एजवर्थ की आवाज है और वह पूछ रहा है, 'क्या तुम बहुत व्यस्त हो?"

सहायक ने कहा, 'हां, मैं व्यस्त हूं।"

एजवर्थ ने फिर से पूछा, 'क्या तुम वाकई बहुत व्यस्त हो?"

सहायक अब अधीर और तनिक गुस्से में बोला, 'आखिर आपको काम क्या है?" एजवर्थ कुछ देर के लिए शांत रहा और फिर बोला, 'मैं बर्फ की चट्टान में दब गया हूं और मुझे बहुत चोट लगी है। मैं दर्द सहन नहीं कर पा रहा हूं।"

यह सुनकर सहायक बहुत शर्मिंदा हुआ। उसने महसूस किया कि उनका लीडर मुश्किल में है अगर ज्यादा देर वह बर्फ में दबा रहता तो उसकी मौत भी हो सकती थी। लेकिन फिर भी मदद मांगने का उसका अंदाज बहुत शालीन था। अपनी जिंदगी को खतरे में देखकर भी उसने आपा नहीं खोया।

कई बार हमें लगता है कि हम दूसरों की स्थितियों को समझते हैं। हम तब गुस्सा हो जाते हैं जब दूसरे हमारे हिसाब से काम नहीं करते। जब दूसरे लोग उनकी तरह से काम करते हैं तो हम उनके स्पष्टीकरण को सुनकर गुस्सा हो जाते हैं और हमें लगता है कि सब बहानेबाजी है। लेकिन हममें से बहुत कम ऐसे होते हैं जो दूसरों की मुश्किलों को समझने की कोशिश करते हैं। बहुत कम लोग शब्दों के पीछे छिपी दूसरों की मजबूरी को समझ पाते हैं। हर व्यक्ति को लगता है कि वही सही है और दूसरे गलत।

याद कीजिए कि जिंदगी में कितने ही मौकों पर दूसरों को आपकी जरूरत रही होगी और आपने बहुत ही रूखा व्यवहार किया होगा। कई बार अपनी मुश्किल परिस्थितियों के चलते लोग आपका काम नहीं कर पाए होंगे लेकिन आप उन्हें ठीक से समझ नहीं पाते।

आध्यात्मिक जीवन में धैर्य और दूसरों को समझने का बड़ा महत्व है। ये हमारे जीवन को बेहतर बनाने में मदद करती हैं। ये गुण हमें कहते हैं कि हमें तुरंत किसी की आलोचना नहीं करना चाहिए। दूसरों को समझने की कोशिश करना चाहिए। हमें दूसरों की स्थितियों को समझने की कोशिश करना चाहिए। हम सभी दूसरों की स्थितियों को समझेंगे, उनके प्रति प्रेम और सहानुभूति रखेंगे तो यह दुनिया अधिक बेहतर हो जाएगी।

तो अगली बार अगर किसी को आपकी मदद की जरूरत हो तो भले ही आपको थोड़ी असुविधा हो मगर उसकी मदद जरूर कीजिएगा। किसी की आलोचना करना हो तो थोड़ी देर के लिए रुककर सोचिएगा और फिर अपनी राय दीजिएगा। तब आप ठंडे दिमाग से और उसकी परिस्थितियों को समझकर राय देंगे। धैर्य और समझबूझ से जीने वाले ज्यादा अच्छा जीवन जी सकते हैं। वे हमेशा अच्छे तरीके से काम करते हैं।

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