आप गलत दिशा में तो नहीं दौड़े जा रहे हैं?Updated: Sun, 13 Aug 2017 11:50 AM (IST)

हर कोई आपको बाहर की दुनिया में सफलता पाना सिखाएगा लेकिन असल बात है अपने मन को शांत कर लेना।

स्वामी सुखबोधानंद

हर कोई आपको बाहर की दुनिया में सफलता पाना सिखाएगा लेकिन असल बात है अपने मन को शांत कर लेना। वह तो आपको खुद ही करना होगा। मन को जीतने के लिए जरूरी है कि हम अपने मनोविज्ञान को बदल लें। एक छोटी-सी कहानी है। एक बार फिलॉसॉफी के प्रोफेसर अपने मित्र को छोड़ने के लिए रेलवे स्टेशन गए। गाड़ी छूटने में थोड़ी देरी थी और सामान गाड़ी में चढ़ाया जा रहा था तो चारों प्रोफेसर बातचीत में व्यस्त हो गए। वे किसी विषय पर चर्चा करने लगे।

वे चर्चा में इतने व्यस्त हो गए कि उन्हें पता नहीं चला कि कब ट्रेन चालू हो गई और धीरे-धीरे आगे सरकने लगी। अभी तीनों प्रोफेसर चर्चा में व्यस्त ही थे कि उनकी नजर ट्रेन पर गई कि ट्रेन छूट रही है। चारों प्रोफेसर उसे पकड़ने के लिए दौड़ पड़े। तीन प्रोफेसर तो ट्रेन में चढ़ गए लेकिन चौथा ट्रेन से बाहर ही रह गया।

वह अपनी आंखों के सामने ट्रेन को जाते हुए देख रहा था। तभी एक बुजुर्ग महिला आई और उसने कहा कि दुखी होने की जरुरत नहीं क्योंकि इसी स्टेशन से 5 मिनट बाद अगली ट्रेन भी जाती है और वह तुम्हें तुम्हारे तीनों दोस्तों से मिलवा देगी। प्रोफेसर ने कहा कि मैं इसलिए दुखी नहीं हूं क्योंकि मेरी ट्रेन छूट गई बल्कि मैं तीन मित्रों के लिए दुखी हूं जो ट्रेन में चढ़ गए हैं। महिला ने आश्चर्य से पूछा- इसमें दुखी होने की बात क्या है यह तो अच्छा है कि उनकी ट्रेन नहीं छूटी। प्रोफेसर ने जवाब दिया- इसलिए क्योंकि वे तीनों मुझे छोड़ने के लिए स्टेशन आए थे।

मित्रो, ये तीनों प्रोफेसर चौथे प्रोफेसर को छोड़ने के लिए आए थे। उन्होंने प्रभावकारी तरीके से सफलता प्राप्त की लेकिन उनकी सफलता असफलता में बदल गई। वे ट्रेन को पकड़ने के लिए क्यों दौड़े, क्योंकि वे यह भूल गए कि वे स्टेशन तक क्यों आए हैं। इसलिए अगर हमें मालूम नहीं है कि हम क्या कर रहे हैं तो हमारी सफलता कोई मायने रखती। अगर हमें जानकारी नहीं है तो हमारा जीवन प्रसन्ना नहीं हो सकता। इसे यूं भी समझिए कि टेक्नोलॉजी बहुत बड़ी है लेकिन जीवन में शांति बहुत कम हो गई है। इसमें टेक्नोलॉजी का कोई दोष नहीं है लेकिन आपको पता होना चाहिए कि उसका उपयोग कैसे करें, तभी आप राहत तलाश पाएंगे।

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