पानी के लिए ओडिशा जाते हैं छत्तीसगढ़ के ग्रामीणUpdated: Sat, 07 Feb 2015 10:23 PM (IST)

सुकमा जिले में शबरी नदी के किनारे छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमा पर रहने वाले ग्रामीण पानी -बिजली को तरस रहे हैं ।

हेमंत कश्यप, जगदलपुर। सुकमा जिले में शबरी नदी के किनारे छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमा पर रहने वाले ग्रामीण पानी -बिजली को तरस रहे हैं । छत्तीसगढ़ वाले पानी के लिए ओडिशा जाते हैं वहीं ओड़िशा के ग्रामीण दवा के लिए छत्तीसगढ़ आते हैं। छत्तीसगढ़ बुड़दी के ग्रामीण 15 साल से हैंडपंप और बिजली मांग रहे हैं, परंतु इन्हें दोनों ही बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं।

जिला मुख्यालय सुकमा से 20 किमी दूर छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमा है । यहीं पर बुड़दी नामक दो गांव हैं । शबरी नदी की तरफ छत्तीसगढ़ बुड़दी है। इस बुड़दी का आपियापारा ओडिशा की सीमा पर बसा है। करीब 15 झोपड़ियों वाले इस आदिवासी बहुल पारा में पानी-बिजली की सुविधा नहीं है, जबकि इससे लगे छत्तीसगढ़ बुड़दी की ही अन्य बस्तियों में पानी, बिजली, राशन दुकान, सरकारी अस्पताल, आंगनबाड़ी, पोटा केबिन, माता रूख्मिणी का बालक आश्रम,साप्ताहिक बाजार आदि हैं। आपियापारा के समारू धुरवा, सुखराम धुरवा,गुनाराम,मनीराम आदि ने बताया कि वे 15 साल से अपनी बस्ती में एक हेण्डपंप और घरों में एकल बत्ती बिजली कनेक्शन मांग रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में घर-खेत ओडिशा में

दो राज्यों की सीमा पर बसे आपियापारा के ग्रामीणों घर तो छत्तीसगढ़ में है, परन्तु अधिकांश लोगों की बाड़ियां और खेत ओडिशा में हैं। छत्तीसगढ़ का निवासी होने के कारण इन्हे किसानी के लिए छत्तीसगढ़ के लेम्प्स से ऋ ण नहीं मिल पाता, वहीं ओड़िशा प्रदेश सरकार इन्हे छत्तीसगढ़ निवासी मान कर अन्य सुविधाएं नहीं देती। उपरोक्त परिस्थितियों के चलते आपियापारा के रहवासी कई सरकारी सुविधाओं से वंचित हैं। यहां के किसानों ने बताया कि लैंपस वाले उनका धान नहीं खरीदते।

पन्द्रह साल से इंतजार

इस संदर्भ में ग्रामीण बुड़दी के सरपंच से लेकर सुकमा के वरिष्ठ अधिकारियों को 15 साल से आवेदन सौंपते आ रहे हैं, परन्तु दोनों ही मांगें अधूरी हैं। पानी के लिए ओड़िशा के एक खेत में स्थापित हेण्डपंप तक जाना पड़ता है। इस बोरिंग के बिगड़ने पर सीमा पर बसे छत्तीसगढ़ और ओडिशा के करीब 70 परिवारों को पानी के लिए अन्यत्र जाना पड़ता है। आपियापारा से लगी बस्ती में बिजली के खंबे हैं परन्तु उन्हें बिजली नहीं दिया जा रहा है। विशेष परिस्थितियों में वे ओडिशा बुड़दी वालों के घर से तार खींच रौशनी करते हैं।

दवा खाते हैं छत्तीसगढ़ का

इधर ओड़िशा बुड़दी के ग्रामीण चमराराम, सुकरा, और मोसूराम ने बताया कि उनकी बस्ती में लगभग सारी सुविधाएं हैं । अस्पताल ही करीब 20 किमी दूर मलकानगिरी में है, इसलिए वे चिकित्सा सुविधा हेतु छत्तीसगढ़ बुड़दी के सरकारी अस्पताल के भरोसे हैं, परन्तु आमतौर पर इस अस्पताल में भी दवा नहीं मिल पाती। विषम परिस्थितियों में वे मरीज को टैक्सी में लिटाकर सुकमा ले जाते हैं।

छत्तीसगढ़ बुड़दी के आपियापारा में पानी- बिजली की समस्या की जानकारी उन्हे नहीं है। बुड़दी सरपंच ने भी कभी इस संदर्भ में जानकारी नहीं दी । वे पंचायत अधीक्षक को बुड़दी भेजकर वस्तुस्थिति की जानकारी लेगें।

-यूके पामभोई, सीईओ जनपद पंचायत सुकमा

14 साल पहले लगा था कैम्प

14 साल पहले सरहदी ग्राम बु़ड़दी की एक दर्जन से ज्यादा समस्याओं को

मीडिया ने लगातार प्रकाशित किया था। इसके बाद तत्कालीन दंतेवाड़ा जिला प्रशासन ने बुड़दी में तीन दिवसीय कैम्प लगाकर वहां की समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया था। उस समय भी सीमा पर बसे आपियापारा की समस्याओं को सामने रखा गया था, परन्तु बीते वर्षों में किसी ने आपियापारा की तरफ ध्यान नहीं दिया।

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