गणतंत्र के 65 साल पूरे, धमतरी क्षेत्र में सूर्य के प्रकाश के भरोसे ग्रामीणUpdated: Sun, 25 Jan 2015 11:44 PM (IST)

26 जनवरी 2015 को गणतंत्र के 65 साल पूरे हो गए लेकिन नगरी ब्लाक के 23 गांव अब भी मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर हैं।

राममिलन साहू, धमतरी। 26 जनवरी 2015 को गणतंत्र के 65 साल पूरे हो गए। चहुंओर विकास ही विकास नजर आ रहा हैं। विद्युत से वीरानी रात भी जगमगा उठती है। पक्की, कांक्रीट सड़कों से आवागमन सुगम हो गए हैं। राजस्व ग्रामों में जिंदगी जीने कहीं कोई दिक्कत नहीं रह गई।

वहीं नगरी ब्लाक के 23 गांव गणतंत्र के 65 साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर हैं। इन गांवों में आवागमन के लिए ठीक से सड़क है न जीवनयापन करने का कोई जरिया। अंधेरी रात काटने बिजली भी नही है। न ही पर्याप्त सुविधाएं उन तक पहुंच रही है। सोलर सिस्टम पर ग्रामीणों की पूरी जिंदगी टिकी हुई है।

नगरी ब्लाक के 23 गांवों के ग्रामीणों की जिंदगी गणतंत्र के 65 साल पूरे होने के बाद भी अधर में है। घोर वनांचल, नदी, नाले और पहाड़ के चलते इन गांवों की गलियों में आज तक विद्युत मंडल की लाइनें नहीं पहुंच पाई। सड़कों की स्थिति नहीं सुधरी।

ग्रामीण आज भी जर्जर व मुरूम वाले कच्ची सड़कों पर चलने मजबूर हैं। ग्रामीणों के जीवन जीने की स्थिति में कोई खास परिवर्तन नहीं आया। पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में पुराने रीति रिवाजों और परिवेशों के बीच किसी तरह जिंदगी काट रहे हैं। आर्थिक तंगी के चलते आज भी क्षेत्र के कई ग्रामीणों के पास तन ढकने के लिए ठीक से कपड़ा नहीं है।

बारिश में ब्लैकआउट

घने वनों के बीच बसे ग्राम बोईरगांव, संदबाहरा, गाताबाहरा, साल्हेभाठ, एकावरी, लीलांज, फरसगांव, डोडाझरिया, खल्लारी, करही, रिसगांव, आमाबहार, मादागिरी, जोरातराई, उजरावन, मासूलखोई, चमेदा समेत 23 गांवों में बिजली की सुविधा नहीं है। अभ्यारण्य क्षेत्र होने की वजह से यहां तक विद्युत कनेक्शन नहीं जा पाया। स्वतंत्रता के 50 साल बाद तक यहां के ग्रामीण रात में अंधेरे में जिंदगी जीने मजबूर थे, लेकिन वर्ष 2001 से क्रेड़ा विभाग के सोलर योजना ने यहां के ग्रामीणों को अंधेरे से मुक्ति दिलाई।

वर्ष 2007-08 में क्रेडा के अधिकारी-कर्मचारियों ने क्षेत्र के पूरे गांवों में सोलर सिस्टम लगाया, तब जाकर उनकी जिंदगी में प्रकाश लौटी। एक जानकारी के अनुसार क्षेत्र के 23 गांवों में अक्षय ऊर्जा विभाग के 28 सोलर सिस्टम लगे हुए हैं, जिससे गांवों में प्रकाश की व्यवस्था होती है।

सोलर सिस्टम में बैटरी की व्यवस्था भी है, जो तीन दिन तक सूर्य नहीं उगने के बाद भी यहां के ग्रामीणों को रात में विद्युत की व्यवस्था उपलब्ध कराती है। उल्लेखनीय है कि बारिश के दिनों में कई दिन तक सूर्य नहीं निकलता। सूर्य की धूप कम पड़ती है।

ऐसे में इन क्षेत्रों में ब्लैकआउट की स्थिति बन जाती है, जिससे ग्रामीणों के लिए कई मुसीबतें खड़ी हो जाती है। चिमनियों और कैंडल के टिमटिमाते प्रकाश में रातें कटती हैं। हैंडपंपों के भरोसे प्यास बुझाते हैं। गर्मी के दिनों में तो ग्रामीणों की मुसीबतें बढ़ जाती है। पेयजल के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

जीवनयापन का साधन नहीं

क्षेत्र में खेती योग्य उपाजाऊ जमीन नहीं है। सिंचाई की सुविधा बिल्कुल नहीं है। विद्युत न होने से इन क्षेत्रों में मोटरपंप नहीं चलते। खेती में पर्याप्त उत्पादन भी नहीं होता। आसपास और दूर-दूर तक कोई फैक्ट्री, उद्योग नहीं है, ऐसे में इन गांवों के ग्रामीणों को अधिकांश दिन काम के लाले पड़े रहते हैं।

पर्याप्त काम नहीं मिलने से आज भी क्षेत्र के ग्रामीण पलायन को मजबूर हैं। आर्थिक तंगी के चलते असुविधाओं के बीच जिंदगी जीने मजबूर हैं। शासन-प्रशासन भी इन क्षेत्रों के ग्रामीणों को पर्याप्त सुविधा उपलब्ध कराने में कामयाब नहीं रहा।

नक्सली दहशत के बीच जीवन

जिले के ये 23 गांव पुलिस प्रशासन के नजरिए में घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र है, जहां कुछ नक्सली घटनाएं हो चुकी है। गाहे-बगाहे नक्सली वारदात की खबरें आती रहती हैं। पुलिस प्रशासन की मानें, तो इन क्षेत्रों में लोगों को नक्सलियों से खतरा है। इसलिए दहशत के बीच जीवने जीने मजबूर हैं। नक्सली दहशत के चलते इन क्षेत्रों में पर्याप्त विकास कार्य भी नहीं हो पा रहा।

इनका कहना है

'ये सभी ग्राम पहले वनग्राम क्षेत्र में आते थे। शासन ने अब इन ग्रामों को राजस्व ग्राम में शामिल किया है। मनरेगा के तहत यहां कार्य कराए गए हैं। आने वाले दिनों में शासन की विभिन्न योजनाओं के तहत इन गांवों में विकास कार्य कराए जाएंगे। यहां के ग्रामीणों को शासकीय योजनाओं का अधिकाधिक लाभ दिलाया जाएगा।'

- भीम सिंह, कलेक्टर धमतरी

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