बेटमा साहिब में शबद कीर्तन के साथ साधना की थी गुरु नानकदेव नेUpdated: Thu, 06 Nov 2014 03:00 AM (IST)

गुरु नानकदेव उज्जैन, ओंकारेश्वर होते हुए पहले बेटमा पहुंचे, जहां लगभग 6 महीने शबद कीर्तन के साथ साधना में वक्त गुजारा।

ज्‍योत्‍सना भोंडवे, इंदौर। जब न इंदौर शहर अस्तित्व में था और न ही होलकर शासन उस वक्त (संवत्‌ 1506) सिखों के गुरु नानकदेवजी का आगमन (उदासीन यात्रा के दौरान) हुआ था। आप उज्जैन, ओंकारेश्वर होते हुए पहले बेटमा पहुंचे, जहां लगभग 6 महीने शबद कीर्तन के साथ साधना में वक्त गुजारा। श्री बेटमा साहिब गुरुद्वारे में प्रतीक स्वरूप श्री नानकदेवजी की चरण पादुका मौजूद है।

गुरु नानकदेवजी ने बेटमा से आकर कुछ समय इंदौर में कान्ह (खान) नदी के किनारे मच्छीबाजार-हरसिद्घी टीले पर गुजारा। उस दौरान सिरपुर, बिलावली, पिपल्या तथा पीलियाखाल नदियों से घिरा यह इलाका हराभरा था। गुरु नानकदेव तीन माह के अपने इंदौर निवास के दौरान सुबह-शाम कृष्णपुरा स्थित चंद्रभागा नदी के संगम पर साधु-संतों से धर्म चर्चा के लिए जाते थे और शबद कीर्तन के साथ साधना में लीन रहते थे।

मान्यता के मुताबिक आपने उस टीले पर जो इमली का पौधो रोपा था वह समय के साथ विशाल वृक्ष में तब्दील हो गया। कालांतर में होलकर रिसायत में पंजाब से आकर बसे सिख परिवारों ने यहां (टीले पर) भव्य गुरुद्वारे (वर्तमान में जवाहर मार्ग, प्रिंस यशवंत रोड चौराहा) का 1940 में निर्माण किया। निर्माण कार्य में बाधा बने गुरु नानकदेव द्वारा रोपे गए इमली के पौधे जो बाद में विशाल वृक्ष बन गया था, को लेकर खूब विवाद भी रहा कि इसे रहने दिया जाए या काट दिया जाए।

श्री गुरु नानकदेव निराकर ब्रह्म के उपासक थे आपने किसी भी वस्तु, पदार्थ या पूजा के स्थान पर शबद ही गुरु है, गुरु ही शबद है। शबद में ही अमृत घुला है मानकर वृक्ष को काट गुरुद्वारे का निर्माण किया गया। गुरुनानकदेवजी और इमली के पौधे के संबंध की स्मृति को सम्मान देते यादगार बनाने के साथ इसे श्री इमली साहिब गुरुद्वारा नाम प्रदान किया गया। वर्तमान में गुरुद्वारे की जो ऊंचाई है उतना ही ऊंचा टीला कभी यहां मौजूद था, जो नदियों की बाढ़ के पानी के साथ कट-कट कर समतल बन गया।

जवाहर मार्ग पर पूरी आन-बान-शान से खड़ा इमली साहिब गुरुद्वारा श्री गुरुनानकदेवजी के प्रति आस्था, विश्वास के साथ शहर की समृद्घि और खुशहाली का भी प्रतीक है। यहां गुरु नानकदेव के प्रकाश पर्व सहित अन्य त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाए जाते हैं।

बेटमा प्रतिनिधि के अनुसार गुरुनानक जयंती के अवसर पर गुरुद्वारा में अनेक आयोजन किए गए। इस दौरान बड़ी संख्‍या में समाजजन वहां पहुंचे।

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