अब चीन में दूसरे बच्‍चे की अनुमतिUpdated: Tue, 07 Jan 2014 05:12 PM (IST)

पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चीन के शीर्ष विधायी मंडल ने एकल-संतान नीति में ढील देने वाले प्रस्ताव को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी है।

अनिल पांडेय, इंदौर। पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चीन के शीर्ष विधायी मंडल ने देश की एकल-संतान नीति में ढील देने वाले प्रस्ताव को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी है। नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की स्थायी समिति ने एक प्रस्ताव पारित कर दंपतियों को दो संतान पैदा करने की इजाजत दे दी है, लेकिन इसके लिए माता या पिता में किसी एक का इकलौती संतान होना जरूरी है। नीतियों में बदलाव की यह घोषणा नवंबर में कम्यूनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेताओं की बैठक के बाद की गई थी। कांग्रेस की छह दिवसीय बैठक में चर्चा के दौरान सामने आए इन सुधारों का परीक्षण पहले ही देश के विभिन्न हिस्सों में किया जा चुका है।

बढ़ती उम्र

इन सुधारों को अमल में लाने के लिए औपचारिक कानूनी मंजूरी की आवश्यकता थी। उल्लेखनीय है कि चीन ने वर्ष 1970 में एक संतान नीति की शुरुआत की थी ताकि तेजी से बढ़ती आबादी पर नियंत्रण पाया जा सके। हालांकि पूरे देश में इस नीति का विरोध जारी था। पिछले एक दशक के दौरान यह अलोकप्रिय भी हो रही थी और नेताओं को डर था कि देश में बुजुर्गों की बढ़ती आबादी की वजह से श्रम शक्ति में कमी आ सकती है। साथ ही वृद्धावस्था से जुड़े मसले भी बढ़ सकते हैं। गौरतलब है कि 2050 तक चीन में एक चौथाई से अधिक आबादी की उम्र 65 साल से अधिक होगी। जातीय अल्पसंख्यकों सहित कुछ अपवादों को छोड़कर एकल संतान नीति को पूरे देश में सख्ती के साथ लागू किया गया था।

एक बच्‍चा नीति के साइड इफेक्ट

चीन में 43 वर्षों से एक संतान नीति लागू है। दुनिया भर के शोधकर्ता इस नीति पर लंबे समय से विचार कर रहे थे। इस नीति के लागू होने से पहले चीनी परिवार में औसतन चार बच्‍चे हुआ करते थे। लेकिन कानून लागू होने के बाद वहां जिंदगी पूरी तरह से बदल गई। जब यह नीति लागू हुई थी तब उन लोगों को भारी परेशानी हुई, जो परंपरागत रूप से बड़े परिवारों में रहने के आदी थे। मगर इन परिस्थितियों में बड़ी हुई संतानें इससे अनभिज्ञ थीं। मैसाच्युसेट्स में एमहर्स्ट कॉलेज की समाजशास्त्री वानेसा फॉग ने 1997 से ही 2,273 चीनी बधों के एक समूह पर नजर रखी। इन बच्‍चों को वो 'सिंगलटंस' कहती हैं।

भाई-बहन का अंतर

उन्होंने इस समूह के 600 से 1,300 बच्‍चों का हर साल साक्षात्कार लिया और यह जानना चाहा कि बगैर भाई-बहन के उनकी जिंदगी कैसी कट रही है? इन बच्‍चों के लिए चचेरे और आनुवंशिक भाई-बहन में अंतर समझना मुश्किल रहा क्योंकि ये बच्‍चे आनुवंशिक भाई-बहन के बिना ही बड़े हुए। यहां तक कि इस समूह के किशोरवय बधों को भी समझाना पड़ता है कि उनका कोई आनुवंशिक भाई या बहन नहीं है। फॉग बताती हैं कि हर परिवार के पास शिक्षा और उपभोग के लिए अचानक आमदनी की एक बढ़ी राशि आ गई है, क्योंकि जो संसाधन कई बच्‍चों को पालने में खर्च होते थे अब वह एक बच्‍चे पर होते हैं।

नतीजतन चीन की ये अकेली संतानें अपनी पिछली पीढ़ी से ज्यादा शिक्षित हैं। इससे चीन की शिक्षा भी रातों-रात महंगी हो गई है। पहले अभिभावक आमतौर पर अपने बधों में से किसी एक को ही स्कूल में पढ़ाने पर ध्यान देते थे। लेकिन अब एक ही बच्‍चे पर माता-पिता दोनों का ध्यान रहता है। चीनी शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययनों समेत कई दूसरे अध्ययनों में पाया गया है कि ऐसे बच्‍चों के व्यक्तित्व में विकृति नहीं है। इस बात का भी कोई प्रमाण नहीं है कि ये बच्‍चे अन्य से किसी भी मायने में अलग हैं। लेकिन कुछ अध्ययनों में कहा गया है कि चीन के ये 'सिंगलटंस' अलग हैं। इस साल ऑस्ट्रेलियाई शोधकर्ताओं ने बीजिंग में एक अध्ययन करके उसका परिणाम जारी किया है। इसमें गेम्स और सर्वे द्वारा व्यवहारगत लक्षणों को आंकने की कोशिश की गई है।

अलग हैं ये बच्‍चे

मेलबर्न विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री निस्वा एर्केल बताते हैं कि उनकी शोध रिपोर्ट के अनुसार चीन की एक संतान नीति लागू होने के बाद पैदा हुए बच्‍चे कम भरोसेमंद, खतरे से विमुख रहने वाले और कम प्रतिस्पर्धी होते हैं। इस सर्वे में हमने पाया कि ऐसे बधो ज्यादा निराशावादी और कम आत्मबल वाले होते हैं। 1970 और 1980 में पैदा हुए बच्‍चों को परवरिश के लिए ज्यादा बड़े परिवार मिले, जबकि हाल में पैदा हुए बच्‍चों को बहुत छोटा परिवार मिला।

चीन की एकल संतान नीति

- एक संतान की नीति से चीन में 40 करोड़ जन्म रोके जाने का अनुमान है।

- उल्लंघन करने वाले लोगों को जुर्माने से लेकर नौकरी खोने या जबरदस्ती गर्भपात तक की सजा होती है।

- कुछ प्रांतों में समय के साथ नीति में ढील दी गई और अकेली संतान वाले अभिभावकों को दूसरी संतान की इजाजत दी गई।

- चीन के जातीय अल्पसंख्यकों और ग्रामीण परिवारों को एक से अधिक बच्‍चे पैदा करने की इजाजत है।

नियमों में ढील

- उन दंपतियों को भविष्य में छूट दी जाएगी जिनमें से एक अपने माता-पिता की एकमात्र संतान है।

- चीन में वर्ष 2012 में 1.6 करोड़ बधो पैदा हुए। परिवार नियोजन आयोग का अनुमान है कि अब हर साल 10 लाख ज्यादा बधो पैदा होंगे।

- ज्यादातर लोगों ने एक से ज्यादा बधो पैदा करना छोड़ दिया है क्योंकि शिक्षा महंगी हो गई हैं।

- मेट्रोपोलिस डेली के एक सर्वे में 25 प्रतिशत लोगों ने कहा है कि वे एक संतान के पक्ष में हैं।

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