पांच दिवसीय दीपोत्सव में हर दिन का अपना महत्‍वUpdated: Sat, 07 Nov 2015 10:20 AM (IST)

पांच दिवसीय दीपोत्सव महापर्व का प्रारंभ 9 नवंबर से शुरू होगा।

ग्वालियर। शहर में पांच दिवसीय दीपोत्सव महापर्व का प्रारंभ 9 नवंबर से शुरू होगा। यह दिन कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनवंतरि जयंती और भगवान कुबेर की पूजा-अर्चना कर मनाया जाएगा। इसके बाद छोटी दीपावली, महालक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजन और 13 नवंबर को भाईदूज पर्व के साथ यह पर्व समाप्त होगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरि की पूजा करने से मनुष्य को उत्तम स्वास्थ और दीर्घ आयु की प्राप्ति व कुबेर पूजन से ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

धन वृद्धिकारक है धनतेरस

- ज्योतिषाचार्य पंडित सतीश सोनी के अनुसार भगवान धनवंतरि को पीयूषपाणि के नाम से भी जाना जाता है। वो भगवान विष्णु के अवतार हैं। त्रयोदशी को शास्त्रों के अनुसार धन वृद्धि कारक तिथि बताई गई है। इस दिन सोना, चांदी, तांबा और अष्ट धातु से बनी वस्तुओं की खरीदारी करने से 13 गुना फल की प्राप्ति होती है। धनतेरस को अबूझ मुहूर्त के रूप में भी जाना जाता है।

धनतेरस का मुहूर्त

- शुभ चौघड़िया - सुबह 9:15 बजे से सुबह 10:36 बजे तक ।

- अभिजीत मुहूर्त - सुबह 11:39 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक ।

- लाभ, अमृत चौघड़िया - शाम 4 से शाम 6:42 बजे तक ।

दक्षिण दिशा की ओर जलाएं दीपक, अकाल मृत्यु से होगी रक्षा

- ज्योतिषाचार्य पंडित सुनील जोशी जुन्न्रकर के अनुसार धनतेरस का संबंध यमराज से भी होता है। इस दिन व्यक्ति को अपने घर के दरवाजे के दक्षिण की ओर मिट्टी के दीपक तेल भरकर जलाना चाहिए। इससे मनुष्य की अकाल मृत्यु से रक्षा होती है।

- इस दिन यह दीपक चर चौघाड़िया में शाम 6 बजे से शाम 7:30 बजे तक जलाया जा सकता है।

रूप चौदस पर मिलेगा सुंदरता का निखार

- कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुदर्शी 10 नवंबर को छोटी दीपावली नरक चतुर्दशी (रूप चौदस) के रूप में मनाई जाएगी। शास्त्रों के अनुसार नरक से सुरक्षा के लिए इस पर्व का विशेष महत्व है। इस दिन सूर्य उदय से पूर्व विशेष रूप से तेल व उबटन लगाकर स्नान करने का महत्व है। साथ ही काले तिल से यम को तर्पण करना चाहिए व शाम को यम के लिए दीपक भी जलाया जाता है।

महत्व - इस दिन रूप में निखार लाने के लिए उबटन बनाकर स्नान करने का महत्व है।

धन की देवी की होगी पूजा

- कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या 11 नवंबर को दीपावली का त्योहार मनाया जाएगा। इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाएगी। साथ ही मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए लोग अपने घरों में दीप जलाकर मां लक्ष्मी को प्रसन्न करेंगे।

महत्व - ऐश्वर्य, समृद्धि, ज्ञान के लिए मां लक्ष्मी और श्रीगणेश, सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है।

गोवर्धन पूजा

- कार्तिक शुक्ल पक्ष की पड़वा 12 नवंबर को गोवर्धन पूजा की जाएगी। इस दिन घर व मंदिरों में गाय के गोबर से भगवान गोवर्धन तैयार कर उनकी पूजा की जाएगी। दूध और चावल चढ़ाए जाएंगे।

महत्व - इस दिन लोग अपने जानवरों के सिर पर मोर पंख बांधते हैं। इससे उनके पशु धन की रक्षा होती है।

भाई दूज, यम द्वितीया

कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को भाई दूज का पर्व 13 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाकर उनकी दीर्घ आयु की कामना करेंगी। शास्त्रों के अनुसार भाई दूज के दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर तिलक कराने गाए थे, क्योंकि वह अपनी व्यस्तताओं के कारण उनसे मुलाकात नहीं कर पाते थे। इस दिन ही वह अपनी बहन के घर गए थे। इसलिए यह पर्व मनाया जाता है।

महत्व - भाइयों की लंबी उम्र के लिए बहन तिलक कर उन्हें श्रीफल भेंट करती हैं।

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