नाव पर टिकी छत्‍तीसगढ़ में वनांचल के ग्रामीणों की जिंदगीUpdated: Tue, 20 Jan 2015 11:01 PM (IST)

माडमसिल्ली क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक गांवों के ग्रामीणों की जिंदगी आज भी नाव पर टिकी है।

धमतरी। माडमसिल्ली क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक गांवों के ग्रामीणों की जिंदगी आज भी नाव पर टिकी है। बांध के चारों ओर कई ग्राम वनांचल गांव हैं। इन गांवों तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग है, लेकिन सड़क मार्गों से गांवों की दूरी काफी अधिक है। ऐसे में इन क्षेत्रों के ग्रामीण अधिकांश कार्यों के लिए गांव जाने और लौटने पर नाव का ही उपयोग करते हैं। इस तरह इन गांवों के ग्रामीणों की जिंदगी नाव पर टिकी हुई है।

जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर पर ग्राम माडमसिल्ली है। यहां अंग्र्रेज जमाने में एक बड़ा बांध माडमसिल्ली बनाया गया है। इसका सायफन पूरे एशिया महाद्वीप में एक है। इस बांध की ख्याति दूर-दूर तक फैली है। बांध के चारों ओर वनांचल में ग्राम सियारीनाला, चनागांव, बीजापुर, झीपाटोला, हितली, जामनाला, रायपारा, हर्राकोठी, आमाकोन्हा, भोथापारा, अमलीपारा आदि गांव हैं। इन गांवों तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग जरूर है, लेकिन सड़क मार्गों से गांवों की दूरी काफी अधिक है। ऐसे में क्षेत्र के ग्रामीण आसपास के गांव पहुंचने के लिए नाव पर निर्भर हैं। अधिकांश कार्यों के लिए गांव जाने और लौटने पर नाव का उपयोग करते हैं। इस तरह इन गांवों के ग्रामीणों की जिंदगी नाव पर टिकी हुई है।

नाव से सफर फायदेमंद

ग्राम रायपारा की मड़ई मनाकर नाव से लौट रहे ग्राम बीजापुर और झीपाटोला के चमरा राम, बिसाहिन बाई, मंशाराम, शिवबती ने बताया कि वे सालों से नाव का उपयोग करते आ रहे हैं। आसपास क्षेत्र के ग्रामीण भी माडमसिल्ली बांध से लगे वनांचल में आने-जाने के लिए नाव का ही उपयोग करते हैं। सड़क मार्ग से यदि ग्रामीण रायपारा जाते हैं, तो उन्हें काफी दूरी तय करनी पड़ती है जबकि नाव से जाते हैं, तो गांव से बांध क्षेत्र की दूरी सिर्फ 7 किलोमीटर है। यही वजह है कि ग्रामीण सड़क मार्ग की बजाए पानी से भरे बांध मार्ग को अधिक पसंद करते हैं। बांध मार्ग से सफर करने से समय व दूरी की बचत होती है। ग्रामीण मड़ई मेला व अन्य कार्यों के लिए नाव में सवार होकर दिगर गांव जाते हैं। बीमार मरीजों को भी नाव से केरेगांव तक इलाज कराने ले जाते हैं।

चार महीने की राहत

मालूम हो कि मुरूमसिल्ली बांध में वर्षाकाल लबालब पानी रहता है। इसका प्रभाव फरवरी तक बना रहता है। इसके बाद गर्मी के दिनों में बांध का पानी सूखता है तो इन गांवों के लोग साइकिलों के जरिए और पैदल आना-जाना करते हैं। इस तरह ग्रामवासियों को गर्मी के दिनों में 4 महीने की राहत मिल जाती है।

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