स्वामी विवेकानंद के जीवन के वे क्षण, जिनमें इतिहास ने स्वयं को दर्ज कियाUpdated: Fri, 12 Jan 2018 11:01 AM (IST)

स्वामी विवेकानंद अपने विचारों, उद्बोधनों और आख्यानों से आज भी भारत के जन-जन में बसे हैं। मगर, उनकी तस्वीरें काफी दुर्लभ हैं।

मल्टीमीडिया डेस्क। स्वामी विवेकानंद अपने विचारों, उद्बोधनों और आख्यानों से आज भी भारत के जन-जन में बसे हैं। उन्होंने जो व्याख्यान, वचन दिए या संवाद किए, वे पुस्तक स्वरूप में तो संकलित मिल जाते हैं, लेकिन उस दौर के स्वामीजी के चित्र बहुत कम उपलब्ध हैं। यहां ऐसे ही दो चित्र दिए जा रहे हैं, जो दुर्लभ हैं।

पहला चित्र सन् 1899 का है, जिसमें स्वामीजी कलकत्ता (अब कोलकाता) स्थित बेलूर मठ में अपने शिष्यों, अनुयायियों और भारतीय संस्कृति के अध्येताओं के साथ बैठे हैं। यह चित्र मठ की स्थापना (1897) के दो वर्ष पूरे होने पर स्वामीजी के व्याख्यान के बाद लिया गया था।

यह मठ स्वामीजी द्वारा हुगली नदी के पश्चिमी तट पर स्थापित किया गया था। तबसे अब तक यह 'रामकृष्ण मिशन" व 'रामकृष्ण मठ" का मुख्यालय है।

वहीं दूसरे चित्र में स्वामीजी अपने उन अनुयायियों के साथ बैठे हैं, जो उनके संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने के

लिए समय, श्रम, धन का योगदान देते थे। ये दोनों छायाचित्र जिन पलों में लिए गए, वे नहीं जानते होंगे कि इन तस्वीरों के साथ वे स्वयं को इतिहास में दर्ज कर रहे हैं।

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