104 सेटेलाइट भेजकर अमेरिका-रूस को छोड़ा था पीछे, जानिए ISRO की बड़ी उपलब्धियांUpdated: Fri, 12 Jan 2018 10:02 AM (IST)

भारत से सैटेलाइट लॉन्च करना दुनिया में सबसे सस्ता और भरोसेमंद है, इसलिए भारत सेटेलाइट लॉन्चिंग के बाजार में तेजी से उभर रहा है।

मल्टीमीडिया डेस्क। 15 अगस्त 1969 में जब विक्रम साराभाई के नेतृत्व में इसरो ने अपना आगाज किया और पहला सेटेलाइट आर्यभट्ट बनाया था, जिसे सोवियत यूनियन ने 19 अप्रैल 1975 को लॉन्च किया था। तब किसी ने सोचा नहीं होगा कि यही इसरो आगे चलकर दुनिया भर में भारत का झंडा बुलंद करेगा।

पिछले कुछ सालों में भारत सेटेलाइट लॉन्चिंग के बाजार में भरोसेमंद देश बनकर सामने आया है। इसरो ने दुनिया के 21 देशों के 79 सेटेलाइट को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया है, जिसमें गूगल और एयरबस जैसी बड़ी कंपनियों के सैटेलाइट शामिल रहे हैं।

भारत से सेटेलाइट लॉन्च करना दुनिया में सबसे सस्ता और भरोसेमंद है, इसलिए भारत सेटेलाइट लॉन्चिंग के बाजार में तेजी से उभर रहा है।

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इस बात का अंदाजा आप इससे ही लगा सकते हैं कि अमेरिका, जापान, चीन और यूरोप की तुलना में सेटेलाइट लॉन्चिंग भारत में 66 गुना सस्ता है। स्पेशल टाइमलाइन फॉर्मेट में जानिए इसरो की बड़ी उपलब्धियों के बारे में, जिन्होंने इतिहास रच दिया...

इसरो का आगाज

15 अगस्त 1969 में जब विक्रम साराभाई के नेतृत्व में इसरो ने अपना आगाज किया और पहला सेटेलाइट आर्यभट्ट बनाया था, जिसे सोवियत यूनियन ने 19 अप्रैल 1975 को लॉन्च किया था। तब किसी ने सोचा नहीं होगा कि यही इसरो आगे चलकर दुनिया भर में भारत का झंडा बुलंद करेगा।

1969-08-15

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अमेरिका और रूस भी पीछे

एक बार में एक साथ 104 सेटेलाइ्ट्स को अंतरिक्ष में भेजकर इसरो ने रूस और अमेरिका के रिकॉर्ड को तोड़ दिया। इससे पहले रूस ने एक बार में एक साथ 37 सेटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे थे। वहीं, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा अब तक एक बार में एक साथ 29 सेटेलाइट ही भेज पाया है। हालांकि, इससे पहले इसरो ने एक बार में एक साथ 20 सैटेलाइट अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक भेजे थे।

2017-02-15

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अपना नेविगेशन सिस्टम मिला

इसरो ने भारत का सातवां नेविगेशन उपग्रह (इंडियन रीजनल नेविगेशन सेटेलाइट सिस्टम) लॉन्च किया, इसके साथ ही भारत को अमेरिका के जीपीएस सिस्टम के समान का नेविगेशन सिस्टम मिल गया। इसके पहले अमेरिका और रूस ने ये उपलब्धी हासिल की। इस साल इसरो ने 34 उपग्रहों को अंतरिक्ष में उनकी कक्षा में स्थापित किया, जिनमें से 33 उपग्रहों को स्वदेश निर्मित रॉकेट से और एक उपग्रह (जीएसएटी-18) को फ्रांसीसी कंपनी एरियानेस्पेस द्वारा निर्मित रॉकेट से प्रक्षेपित किया। भारतीय रॉकेट से प्रक्षेपित 33 उपग्रहों में से 22 दूसरे देशों के थे। शेष 11 उपग्रह इसरो और भारतीय शिक्षण संस्थानों द्वारा निर्मित थे।

2016-04-28

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मंगलयान का सफल प्रक्षेपण

इसरो ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से पीएसएलवी सी 25 से मंगलयान को सफलतापूर्वक छोड़ा था, जो 24 सितंबर 2014 को मंगल पर पहुंचने में सफल हो गया। इस उपलब्धि के साथ ही भारत पहले ही प्रयास में मंगल पर यान भेजने वाला दुनिया का पहला देश बन गया। सोवियत रूस, अमेरिका और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के बाद मंगल पर यान भेजने वाले देशों की कतार में भारत भी आ गया।

2013-11-05

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चंद्रयान ने रचा इतिहास

इसरो ने 2008 मे चंद्रयान बनाकर इतिहास रचा था। 22 अक्टूबर 2008 को इस मानव रहित अंतरिक्ष यान को चांद पर भेजा गया। इससे पहले सिर्फ छह देश ही ऐसा कर पाए थे। अंतरिक्षयान चंद्र के रासायनिक, खनिजीय और प्रकाश-भौमिकी मानचित्रण के लिए चंद्र सतह से 100 किमी की ऊंचाई पर चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा था।

2008-10-22

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