ये हैं 2014 की सबसे अच्‍छी और बुरी फिल्‍में

Publish Date:Sat, 27 Dec 2014 05:34 PM (IST)

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के लिए यह बहुत अच्छा साल भले ही नहीं हो लेकिन इसे बेहतर तो कह सकते हैं। 2013 में जहां हमें 'काई पो छे', 'द लंचबॉक्स', 'शाहिद', 'लुटेरा' और 'राम लीला' जैसी फिल्में देखने को मिली, वहीं इस साल कुछ फिल्मों ने पर्दे पर जादू बिखेरा। साल की शुरूआत में युवा एक्टर्स की फिल्मों ने अच्छा प्रर्दशन किया तो 2014 के सेकंड हाफ में निराशा हाथ लगी। डालते हैं ऐसी कुछ फिल्मों पर नजर जो कि साल की सबसे अच्छी और बुरी फिल्म होने का खिताब पा चुकी है।

बेस्‍ट फिल्‍में - हाईवे : बॉलीवुड की बेहतरीन रोड मूवीज में से एक हाईवे में इम्तियाज अली ने यौन शोषण की शिकार लड़की की कहानी काफी संवेदना के साथ पेश की। एक क्रिमिनल ट्रक ड्राइवर के साथ आने वाले लड़की अपने घर से दूर भागना चाहती है। फिल्म में आलिया भट्ट और रणदीप हूडा ने मुख्य भूमिका निभाई थी।

क्वीन : इस फिल्म ने कई स्तरों पर काम किया है। आत्मविश्वास की कमी रखने वाले एक लड़की अकेले हनीमून पर निकल पड़ती है जब होने वाला पति उसे धोखा दे देता है। इस यात्रा में वह अपने अंदर की यात्रा भी तय करती है और एक आत्मविश्वास से भरपूर लड़की के रूप में उबर कर सामने आती है। फिल्म में कंगना रनौत ने लीड रोल किया है और उनकी परफॉर्मंस की खूब तारीफ हुई।

हैदर : शेक्सपीयर की हेमलेट पर जबर्दस्त रूपांतरण करते हुए निर्देशक विशाल भारद्वाज के निर्देशन ने एक शानदार विजुअल एक्सपीरियंस दिया। प्रतिभावान कलाकारों शाहिद कपूर, तब्बू, इरफान, के के मेनन के साथ इस फिल्म को अलग स्तर पर ले जाने में आसानी हुई।

फिल्मीस्तान : इसे एक छोटी लेकिन प्रभावशाली फिल्म कह सकते हैं। इस फिल्म में कोई स्टार कास्ट नहीं थीं ना ही पारंपरिक रूप से खूबसूरत दिखने वाले लीड एक्टर्स थे लेकिन यह दर्शकों के दिल को छूने में कामयाब रही। इसकी कहानी कहने की तकनीक, स्क्रिप्ट और कलाकारों के अभिनय ने जबर्दस्त छाप छोड़ी।

आंखों देखी : रजत कपूर कम बजट की फिल्में बनाने के लिए पहचाने जाते हैं। एक बार फिर उनकी निर्देशित फिल्म आंखों देखी ने दर्शकों का दिल जीत लिया। संजय मिश्रा के शानदार अभिनय ने साधारण कहानी में जान डाल दी।

पीके : देश के सबसे संवेदनशील विषय में से एक धर्म और भगवान पर बनीं एक साहसी फिल्म रही। हालांकि इस फिल्म को लेकर काफी विरोध भी हो रहा है। फिल्म में आमिर खान ने एलियन की भूमिका निभाई है।

मर्दानी : रानी मुखर्जी ने लाइफटाइम रोल इस फिल्म में किया है। वे फिल्म में पुलिस अधिकारी बनीं है जो कि मानव तस्करी के खिलाफ लड़ती है। प्रदीप सरकार को इस फिल्म का पूरा श्रेय जाना चाहिए जिसने शुरू से लेकर अंत तक फिल्म पर पकड़ ढीली नहीं होने दी।

ये फिल्‍में नहीं कर पाईं प्रभावित- लक्ष्मी : इकबाल व डोर जैसी फिल्में बना चुके नागेश कुकुनूर के पास अनुभव, संसाधन व स्त्रोत है लेकिन फिल्म मेकिंग में अपने तरीके में वे गुणवत्ता लाने की कोशिश नहीं करते। तभी फिल्म लक्ष्मी फिल्म का विचार अच्छा है लेकिन इसकी प्रस्तुति और निर्माण की लापरवाही निराश करती है।

सुपरनानी : यह फिल्म एक नानी के रातों रात सुपरमॉडल बनने के बारे में है लेकिन यह एक वास्तविक स्क्रिप्ट से कहीं ज्यादा एक बुजुर्ग महिला की कल्पना ज्यादा लगती है।

क्रीचर 3डी : यह फिल्म क्रीचर नाम के जानवर से डर पैदा करने के लिए हॉरर जॉनर के हिसाब से बनाई गई लेकिन अंत में यह हास्यास्पद ही साबित हुआ। बिपाशा ने भले ही अपने किरदार को जीने की कोशिश की हो लेकिन वह प्रभाव नहीं छोड़ पाई।

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