शाहजहां व मुमताज की कब्रों की उपेक्षा, पीली पड़ींUpdated: Fri, 22 May 2015 11:04 PM (IST)

दुनिया को मुहब्बत की दास्तां और अनूठी वास्तुकला से दीवाना बनाने वाले ताजमहल की आत्मा अनदेखी से तड़प रही हैं।

आगरा। दुनिया को मुहब्बत की दास्तां और अनूठी वास्तुकला से दीवाना बनाने वाले ताजमहल की आत्मा (शहंशाह शाहजहां और मुमताज की मुख्य कब्रें) अनदेखी से तड़प रही हैं। ताज में जहां सैलानी जाते हैं, सबकी नजरें हैं, वहां संरक्षण कार्य पूरे साल चलता है, लेकिन मुख्य कब्रों और उनके कक्ष का सालों से संरक्षण नहीं हुआ। ऐसे में कब्रों का संगमरमर पीला पड़ गया है और कक्ष की दीवारें काले धब्बों से अटी पड़ी हैं।


मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में ताजमहल का निर्माण कराया था। बाद में शाहजहां की मृत्यु के बाद उनकी कब्र भी मुमताज के बगल में बनाई गई। दोनों की मुख्य कब्रें ताज के मुख्य मकबरे के नीचे के कक्ष में बनी हैं। इनके ठीक ऊपर इन कब्रों की प्रतिकृति बनाई गई हैं। वर्तमान में सैलानी इन्हीं प्रतिकृति का दीदार करते हैं।

मुख्य कब्रों के कक्ष पर ताला पड़ा रहता है। ये हर साल केवल तीन दिन के लिए शाहजहां के उर्स पर ही खोली जाती हैं। बीती 15 से 17 मई तक उर्स के दौरान इन्हें खोला गया था। वर्तमान में इन कब्रों पर लगा पत्थर पीला पड़ गया है, कक्षा की दीवारों और फर्श पर काले धब्बों की भरमार है।

सूत्रों के मुताबिक अनदेखी के चलते यह हाल हुआ है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने सालों से मुख्य कब्रों और संबंधित कक्ष में कोई संरक्षण कार्य नहीं कराया है। ऐसे में यहां बदहाली बढ़ती जा रही है। जबकि बाहरी हिस्सों में पच्चीकारी के संरक्षण से लेकर संगमरमर को चमकाने के लिए मडपैक थेरेपी लगातार चल रही है। मुख्य कब्रों की बदहाली के सवाल पर अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. भुवन विक्रम ने बताया कि ताज के संरक्षण के लिए वृहद योजना तैयार की जा रही है। इसमें मुख्य कब्रों और संबंधित कक्ष का भी संरक्षण किया जाएगा।

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