पाटन की बावड़ी यूनेस्को विश्व धरोहर सूची मेंUpdated: Sun, 22 Jun 2014 11:49 PM (IST)

सोलंकी राजा भीमदेव की याद में उनकी पत्नी ने 1063 में कराया था निर्माण।

नई दिल्ली। गुजरात के पाटन स्थित "रानी की वाव" को यूनेस्को की विश्व विरासत स्थल सूची में शामिल किया गया है। यूनेस्को ने 11वीं सदी में बने इस सीढ़ीदार कुएं (बावड़ी) को तकनीकी विकास का असाधारण उदाहरण बताया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूनेस्को के इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने ट्वीट किया, गुजरात का नाम यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में जुड़ना गर्व की बात है। अगली बार जब आप गुजरात जाएं, तो रानी की वाव जरूर देखें।

रानी की वाव समेत भारत में अब तक 31 स्थलों को विश्व धरोहर सूची में जगह मिल चुकी है। इनमें 24 सांस्कृतिक स्थल शामिल हैं। संस्कृति मंत्रालय ने रविवार को एक बयान जारी कर कहा, "कतर में चल रहे वर्ल्ड हैरिटेज कमेटी सेशन में यूनेस्को ने रानी की वाव को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने को मंजूरी दे दी है। यूनेस्को ने इसके निर्माण और जल प्रबंधन प्रणाली को भूमिगत जल संसाधनों के उपयोग का असाधारण उदाहरण माना है। यह भूमिगत संरचना का अनूठा नमूना है और इसमें पत्थरों पर शानदार कलाकृतियां उकेरी गई हैं।

मंत्रालय के मुताबिक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने पिछले साल फरवरी में रानी की वाव को विश्व विरासत स्थल सूची में शामिल करने के लिए मनोनित किया था। इसके बाद अक्टूबर में यूनेस्को की एक टीम ने इसका दौरा किया था। इस बावड़ी का निर्माण वर्ष 1063 में सोलंकी राजवंश के संस्थापक राजा भीमदेव की याद में उनकी पत्नी ने करवाया था। बावड़ी मूल रूप से सात मंजिला थी, लेकिन इसकी पांच मंजिलों को ही सुरक्षित रखा जा सका है।

संबंधित खबरें

जरूर पढ़ें

FOLLOW US

Copyright © Naidunia.