केंद्र व दिल्ली सरकार से एनजीटी ने मांगा जवाबUpdated: Tue, 15 Dec 2015 09:27 PM (IST)

दोगुना हो सकता है वाहनों पर लगने वाला पर्यावरण शुल्क पैकेज, कहा, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले आदेश जारी करना सही नहीं।

नई दिल्ली। नए डीजल वाहनों के दिल्ली में पंजीकरण पर रोक लगाने संबंधी अपने फैसले पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने केंद्र सरकार व दिल्ली सरकार से बुधवार तक अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। एनजीटी ने कार डीलरों की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया है, जिसमें डीलरों ने रोक लगाने संबंधी फैसले में कुछ परिवर्तन करने की अपील की है।

एनजीटी के चेयरमैन स्वतंत्र कुमार की पीठ ने कहा कि मामले में सड़क परिवहन मंत्रालय, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय व भारी उद्योग मंत्रालय अपना हलफनामा दायर करे। एनजीटी ने कहा कि डीजल वाहनों का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से पहले इस मसले पर किसी तरह का आदेश जारी करना सही नहीं होगा।

उसने कहा कि दिल्ली सरकार के सम-विषम नंबर योजना को लेकर उसे कोई आपत्ति नहीं है। उसने इस पर कुछ सवालों के जवाब मांगें हैं। वह चाहती है कि योजना से लोगों को कोई परेशानी न हो और यह सही से लागू हो। इस मसले पर फैसला लेना दिल्ली सरकार के अधिकार क्षेत्र में है।

वहीं, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की वकील पिनाकी मिश्रा ने कहा कि एनजीटी का यह फैसला काफी कठोर है। डीलरों का डीजल वाहनों का स्टॉक इस आदेश के बाद अटका पड़ा है। एनजीटी अगर अपने फैसले में कुछ फेरबदल कर दे तो डीलरों को राहत मिल सकती है।

गत 11 दिसंबर को एनजीटी ने अपने आदेश में कहा था कि दिल्ली सरकार अब राजधानी में किसी भी नई डीजल वाहन का रजिस्ट्रेशन न करे। साथ ही 10 साल पुराने डीजल व 15 साल पुराने पेट्रोल वाहन का रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण न किया जाए।

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