टेनरियों के प्रदूषण का हल निकालने को एनजीटी ने बनाई समितिUpdated: Wed, 04 Feb 2015 10:35 PM (IST)

10 मार्च को होगी इस मामले की अगली सुनवाई।

नई दिल्ली। कानपुर के जाजमऊ और उसके आस पास सैकड़ों टेनरियों से गंगा में हो रहे प्रदूषण को रोकने के उपाय तलाशने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। एनजीटी ने इस समिति को चार सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट देने को कहा है। एनजीटी अब इस मामले की 10 मार्च को सुनवाई करेगा।

एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने बुधवार को गंगा में प्रदूषण के मामलों की सुनवाई पर एक आदेश जारी करते हुए इस समिति का गठन किया। उत्तर प्रदेश के पर्यावरण मामलों से संबंधी प्रमुख सचिव को समिति का प्रमुख बनाया गया है जबकि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उत्तर प्रदेश जल निगम के शीर्ष अधिकारी इसके सदस्य होंगे।

यह समिति इस बात पर विचार करेगी कि टेनरियों से कितना प्रदूषण होता है। उसमें क्रोमियम के अलावा कौन-कौन सी भारी धातुएं होती हैं और वहां कितना सीवेज या एफ्लुएंट निकलता है। एनजीटी ने यह आदेश गंगा में औद्योगिक प्रदूषण रोकने के लिए कृष्णकांत सिंह की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।

याचिकाकर्ता के वकील राहुल चौधरी ने यह जानकारी देते हुए कहा कि समिति इस बात पर भी विचार करेगी कि वहां कितनी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की आवश्यकता है।

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