महिला हज यात्रियों की सहायता के लिए सरकार भेजे महिला सेवक : शाइस्ता अंबारUpdated: Mon, 06 Nov 2017 11:31 PM (IST)

आल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबार ने कहा कि सरकार को हज यात्रियों के साथ महिला सेवक भी भेजने चाहिए।

कानपुर। बड़ी संख्या में महिलाएं हज करने जाती हैं। हज यात्री (आजमीन) की सेवा और मदद के लिए पुरुष सरकारी कर्मियों को खुद्दाम बनाकर उनके साथ भेजा जाता है लेकिन इनमें महिलाओं को नहीं भेजा जाता। इससे महिलाओं को अपनी समस्याएं साझा करने में असुविधा होती है। इसलिए, सरकार को हज यात्रियों के साथ महिला खुद्दाम (सेवक) भी भेजने चाहिए।

आल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की राष्ट्रीय अध्यक्ष शाइस्ता अंबार ने बताया कि मर्दों की सेवा और मदद के लिए पुरुष खुद्दाम जाएं और महिला आजमीन के लिए महिला खुद्दाम जाएं, क्योंकि कई ऐसी बातें होती हैं जो पुरुष से महिलाएं शेयर नहीं कर पातीं। यदि किसी महिला की हज के दौरान तबीयत खराब हो जाए तो उन्हें दवा कौन देगा।

शहरकाजी (महिला) हिना जहीर ने बताया कि जो शरीयत कहता है, उसी पर अमल किया जायेगा। कोई महिला अगर हज करने जा रही है तो उसके साथ महेरम (खूनी रिश्ते का पुरुष) का होना जरूरी है। कुरान में अल्लाह ने स्पष्ट किया है कि बिना महेरम के कोई महिला हज पर नहीं जायेगी। अगर शरीयत के खिलाफ कोई काम होगा तो वह कुबूल नहीं होगा।

खिदमतगार होते खुद्दाम-

हज आजमीन की मदद और खिदमत के लिए केंद्र और राज्य सरकार हज आजमीन के साथ सहायक (खुद्दाम) भेजते हैं। खुद्दाम वही बनाये जाते हैं जो सरकारी कर्मचारी हैं, लेकिन अब गैर सरकारी लोगों को भी खुद्दाम बनाकर भेजने की बात सामने आयी है। आल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड ने ये आवाज उठायी है कि महिला आजमीन की खिदमत के लिए महिला खुद्दाम भेजें।

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