10 साल की दुष्कर्म पीड़िता और उसकी जांच अधिकारी एक साथ ही बनेंगी मांUpdated: Sun, 30 Jul 2017 10:20 AM (IST)

अपनी चिंता व कष्ट भूल पीड़ित पर ममता लुटा रही, मानसिक तौर पर कर रही तैयार।

पुलिस अधिकारी अपनी सेहत को भूल बच्ची को दे रही समय।

अपनी चिंता व कष्ट भूल पीड़ित पर ममता लुटा रही, मानसिक तौर पर कर रही तैयार।

डॉ. सुमित सिंह श्योराण, चंडीगढ़। ये दोनों मां बनेंगी। लगभग एक साथ। दोनों रहती भी ज्यादातर समय साथ हैं। फर्क इतना है कि एक मजबूरी में मां बनने जा रही दस साल की दुष्कर्म पीड़िता है। दूसरी उसी के साथ इन दिनों सबसे अहम रोल अदा कर रही उसके केस की जांच अधिकारी। यह पुलिस अधिकारी अपनी चिंता व कष्ट भूल इस बच्ची पर ममता लुटा रही है। उसे मानसिक तौर पर तैयार कर रही है।

शुक्रवार को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दस साल की दुष्कर्म पीड़िता बच्ची को अब गर्भ में पल रहे बच्चे को जन्म देना ही होगा। जो खुद बच्ची है उसे अपने जीवन के सबसे क्रूर इम्तहान से गुजरना पड़ रहा है। यह सोच कर ही हर कोई सिहर उठता है कि वह इतनी मानसिक व शारीरिक पीड़ा कैसे सहेगी? सुकून केवल यही है कि एक संबल उसे मिल गया है। वह है चंडीगढ़ पुलिस की एएसआई और इस मामले की जांच अधिकारी प्रतिभा।

2009 में चंडीगढ़ पुलिस में भर्ती हुईं प्रतिभा इन दिनों सेक्टर-39 के थाने में तैनात है। वह मूलतः हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले की हैं।

प्रतिभा हर रोज बच्ची के घर पर तो जाती ही हैं, साथ ही उसके साथ देर शाम तक भी फोन पर संपर्क में रहती है। कुछ ही दिनों में दोनों के बीच एक खास रिश्ता बन गया है।

इस महिला अधिकारी की हिम्मत देखिए वह अपनी तकलीफों को छोड़ उस बच्ची की जिंदगी और उसके होने वाले बच्चे के लिए घंटों तक अपना आराम छोड़ उसके साथ रहती है। दिन में ड्यूटी के साथ ही वह किसी भी समय लड़की के घर पर जाकर उसका हालचाल पूछने चली जाती हैं। यह सिलसिला पिछले काफी दिनों से चल रहा है।

बच्ची तो बच्ची है। उसे ममतामयी स्पर्श मिला तो जांच अधिकारी से रिश्ता लगातार मजबूत होता जा रहा है। वह एक मां की तरह इस महिला अधिकारी के साथ वक्त बिताना पसंद करती है और बहुत सारी बातें शेयर करती है।

एक बड़े अधिकारी को जब खुद आईओ के गर्भवती होने के बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने उनसे केस से हटने की ऑफर भी दिया, लेकिन महिला अधिकारी ने इससे मना कर दिया। कोर्ट में काफी समय खड़े रहते हुए महिला अधिकारी के पैरों में सूजन तक आ गई, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।

मैं कोई बड़ा काम नहीं कर रही। यह तो हर इंसान की ड्यूटी है कि वह जरूरत में किसी का सहयोग करे। बच्ची के साथ वक्त बिताना मुझे भी बहुत अच्छा लगता है। बच्ची बहुत ही क्यूट है। हादसे के बारे में कोई बात नहीं होती। बच्ची भी जब चाहे फोन पर बात कर लेती है। मुझे भी बच्ची का साथ काफी अच्छा लगता है। कई बार उसकी मासूम बातों से दिल भर आता है। उसे आने वाले दिनों में काफी देखभाल और भावनात्मक सहारे की की जरूरत है। - प्रतिभा, एएसआई, चंडीगढ़ पुलिस

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