HC और SC में न्यायधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया फिर चर्चा में आईUpdated: Fri, 12 Jan 2018 10:27 PM (IST)

हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में है।

नई दिल्ली। हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों की ओर कुछ दिन पूर्व लिखे गए पत्र में भी इसका जिक्र है। न्यायाधीशों की नियुक्ति की नई व्यवस्था वाले एनजेएसी कानून को रद्द करते समय सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम व्यवस्था में सुधार पर विचार करने को राजी हो गया था।

साथ ही कोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया तय करने के लिए सरकार से नया मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर (एमओपी) तैयार करने को कहा था। तब से अब तक नया एमओपी तैयार होकर लागू नहीं हुआ है। गत वर्ष मार्च में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने एमओपी मंजूर करके सरकार को भेज दिया है। इस बात की पुष्टि चार न्यायाधीशों की ओर से जारी पत्र में भी होती है।

इसमें कहा गया है कि कोलेजियम ने मार्च 2017 में एमओपी मंजूर कर लिया था। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ने उसे सरकार को भेज दिया था। सरकार की ओर से उस पर कोई जवाब नहीं आने का मतलब है कि सरकार ने उसे स्वीकार कर लिया है।


बताते चलें कि एमओपी को लेकर सरकार और कोलेजियम के बीच करीब डेढ़ साल तक तनातनी रही। सरकार ने दो बार एमओपी मंजूरी के लिए कोलेजियम को भेजा। कोलेजियम ने उस पर आपत्ति करते हुए सरकार को वापस भेज दिया था। लेकिन, मार्च 2017 में कोलेजियम की ओर से एमओपी मंजूर कर सरकार को भेजा जा चुका है।

न्यायाधीशों की नियुक्ति की पारदर्शी व्यवस्था लागू होने के लिए इसका लागू होना जरूरी है। सरकार ने जो एमओपी ड्राफ्ट किया है उसमें कोलेजियम अगर किसी का नाम खारिज करती है, तो उसे लिखित में उसका कारण दर्ज करना होगा। इसके अलावा कोलेजियम को मदद करने के लिए एक कमेटी का प्रस्ताव किया गया है।

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