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अहिल्याबाई ने कराया था देवगुराड़िया मंदिर का जीर्णोद्धारUpdated: Tue, 13 Feb 2018 04:01 AM (IST)

नेमावर रोड स्थित ग्राम देवगुराड़िया का शिव मंदिर होलकर राज्य के प्राचीन मंदिरों में से एक है।

कमलेश सेन, इंदौर। नेमावर रोड स्थित ग्राम देवगुराड़िया का शिव मंदिर होलकर राज्य के प्राचीन मंदिरों में से एक है। देवी अहिल्याबाई मई 1784 में महेश्वर से इंदौर प्रवास पर आई थीं तो छत्रीबाग में ठहरी थीं। उसी दौरान वे गरुड़ तीर्थ देवगुराड़िया शिव मंदिर के दर्शन के लिए गई थी। इतिहास में इस बात का उल्लेख है कि यह मंदिर 1784 के भी पहले का है।

कैप्टन सीई लुआर्ड के 'इंदौर स्टेट गजेटियर 1896' में इस बात का उल्लेख है कि देवगुराड़िया में महाशिवरात्रि के मौके मेला लगता है। तत्कालीन मुगल शासक औरंगजेब द्वारा कंपेल के कानूनगो को मेले के हर दुकानदार से कर वसूली का अधिकार दिया गया था। इसी गजेटियर में उल्लेख है कि इंदौर होलकर स्टेट रेलवे (1874) का कार्य शुरू हुआ तो इसी पहाड़ी से खुदाई कर निर्माण सामग्री ले जाई गई।

इतिहास में उल्लेख है कि देवी अहिल्याबाई ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। 'महेश्वर दरबाराची बातमी पत्रे' में देवगुराड़िया के गरुड़ तीर्थ का पवित्र स्थल के नाम से उल्लेख मिलता है। यहां का शिव लिंग गुटकेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। तत्कालीन होलकर राजा महाशिवरात्रि के मौके पर इस मंदिर में दर्शन करने आते थे। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाता था। देवगुराड़िया में हर साल महाशिवरात्रि पर मेला लगता है, जो फाल्गुन कृष्णपक्ष में चौदस से शुरू होता है।

मंदिर परिसर में कुंड के साथ नागचंद्रेश्वर महादेव भी स्थापित हैं। दक्षिण पश्चिम में बावड़ी और प्राचीन वृक्ष हैं। यह मंदिर उत्तरामुखी और अर्ध शैलोत्कीर्ण है। शिव लिंग गर्भगृह में पूर्व की ओर स्थित है। सामान्य दिनों में शिव लिंग पर जलाभिषेक होता रहता है। संभवतः किसी स्त्रोत से इसे जोड़ा गया होगा। यह मंदिर प्राचीन मंदिर की परंपराओं के अनुसार पुननिर्मित है। सूर्य कुंड और नागचंद्रेश्वर मंदिर के कुंड को विभाजित करते हुए मंदिर का मुख्य द्वार है। इसके प्रवेश द्वार पर दोनों ओर 11-12 वीं शताब्दी के शिल्प कौशल को दर्शित करने वाले पद्मपुष्प जुड़े हैं।

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