मकान हटाने आए अमले के खौफ से गोद से गिरा बेटा, मौतUpdated: Sun, 14 Jan 2018 03:48 AM (IST)

अंदर भागी मां की गोद से सवा महीने का बेटा छूटकर जमीन पर गिर गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। जिस मकान में शादी होकर आई थी उसी के टूटने के खौफ से अंदर भागी मां की गोद से सवा महीने का बेटा छूटकर जमीन पर गिर गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। जिसकी किलकारियों से अभी कुछ समय पहले ही पूरा घर गूंजा था अब वो हमेशा के लिए खामोश हो गया। यह दर्द भरी दास्तान है मुरार जड़ेरुआ रोड पर रहने वाली राधा पत्नी गजराज सिंह की।

घटना शुक्रवार शाम उस समय हुई जब जिला प्रशासन की टीम दलबल के साथ अतिक्रमण की चपेट में आने वाले मकानों पर निशान लगाने पहुंची थी। राधा को लगा कि इतनी संख्या में यह लोग आए हैं तो आज ही मकान तोड़ देंगे। 25 साल तक जिस मकान में रहे उसे तोड़ने वालों ने गोद से बेटा और सिर से हमेशा के लिए छत छीन ली।

एक दिन पहले आईसीयू से लेकर घर आए थे

पेशे से मजदूर गजराज सिंह ने बताया कि 25 साल पहले उसके पिता ने 15 हजार रुपए देकर जंगल के बीच में यह जमीन खरीदी थी। उसके बाद हमने इस पर मकान बनाया। सवा महीने पहले पत्नी राधा ने बेटे को जन्म दिया। पूरा परिवार बहुत खुश था। बच्चे का नाम हमने धर्मेन्द्र रखा और सोचा कि यह हमारा नाम रोशन करेगा। पर पैदा होने के 4 दिन बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद बच्चे को आईसीयू में भर्ती कराया गया। लम्बे इलाज के बाद गुरुवार को उसकी डॉक्टर ने छुट्टी की और उसे लेकर हम घर आ गए। इलाज में काफी पैसा भी लग गया। पर सुकून था कि बेटा सुरक्षित घर आ गया। हम यह नहीं जानते थे कि यह नन्हा कुछ दिन का ही मेहमान है और तोड़फोड़ करने वालों की दहशत उसे निगल जाएगी। अब पूरा परिवार खुले मैदान में अपना सामान लेकर बैठा है। राधा के एक और बेटा है, जो ढाई साल का है।

मेरे लिए तो ससुराल था यह घर, अब कहां जाएं

जड़ेरुआ निवासी सोना पत्नी राजासिंह की आंखों में आंसू थे और उनका कहना था कि मेरे लिए तो यह मकान ही ससुराल था। शादी होने के बाद पहला कदम ही इस घर में रखा था। बेटियों को भी इसी घर से विदा किया। अचानक कुछ लोग आए और लाल निशान लगाकर कह दिया कि इस जगह पर निर्माण अवैध है। इसमें मेरे जीवन के कई साल लगे हैं। बच्चों के पैदा होने से बेटियों की विदाई तक की यादें हैं। उन्होंने कुछ नहीं सुना सिर्फ एक झड़के में तोड़ दिया। न कोई मुआवजा दिया न ही कोई रहने की व्यवस्था की।

अपने बचपन से बच्चों के बचपन तक गुजरा है यहां-

मंगल सिंह पुत्र रामेश्वर कुशवाह ने बताया कि उनके पिता ने 15 हजार रुपए में गज्जू नामक युवक से यह जगह खरीदी थी। उस समय यहां जंगल था। वह इसी घर में पैदा हुआ। इसी घर से उसकी शादी भी हुई। उसके बच्चों का बचपन भी इसी घर में गुजरा और आज क्या वो घर ही नहीं बचा। कुछ लोगों ने अवैध बताकर निशान लगाया और तोड़ गए। हद तो तब हो गई जब जिला प्रशासन ने निशान लगाने के साथ ही आगे बढ़ते हुए पूरा मकान ही तोड़ दिया।

सेना की दीवार हिलाने की नहीं किसी में हिम्मत

विनोद पाल का कहना है कि सड़क पर दोनों तरफ तुड़ाई कर जगह नापी जानी चाहिए थी। पर सड़क के दूसरी ओर सेना की बाउंड्रीवॉल है। वहां किसी भी अधिकारी या पुलिस की हिम्मत नहीं पड़ी। हम गरीब और मजदूर हैं इसलिए हमारे मकान ताश के पत्तों के तरह ढहा दिए।

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