जिन्होंने की प्याज खरीदी की निगरानी, उनको ही दे दिया घोटाले की जांच का जिम्मा, उठे सवालUpdated: Sat, 26 Aug 2017 04:02 AM (IST)

- राजधानी में हुए 17 हजार 400 क्विंटल प्याज घोटाले की जांच में मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी वाले अफसरों की नहीं हुई जांच भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि राजधानी में हुए 2.3 करोड़ रुपए के प्याज घोटाले में जांच रिपोर्ट भले ही शासन को भेज दी गई हो, लेकिन अब इस पर सवाल उठने शुरू हो गए है। जांच रिपोर्ट में दोषी पाए गए तीन विभाग के साथ-साथ चार अन्य अफसरों क

- राजधानी में हुए 17 हजार 400 क्विंटल प्याज घोटाले की जांच में मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी वाले अफसरों की नहीं हुई जांच

भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि

राजधानी में हुए 2.3 करोड़ रुपए के प्याज घोटाले में जांच रिपोर्ट भले ही शासन को भेज दी गई हो, लेकिन अब इस पर सवाल उठने शुरू हो गए है। जांच रिपोर्ट में दोषी पाए गए तीन विभाग के साथ-साथ चार अन्य अफसरों को बख्श दिया गया। यह वे अफसर हैं जो खरीदी से लेकर खराब हो चुकी प्याज को नष्ट करने में जुड़े थे। यह है खाद्य विभाग से जिला खाद्य अधिकारी, सहकारिता विभाग उपायुक्त सहकारिता और गोविंदपुरा व बैरसिया सर्किल के एसडीएम। इन अफसरों की भूमिका पर भी सवाल उठने लाजमी है। क्योकि अगर इन विभाग के अफसरों ने सख्ती से निगरानी की होती तो यह घोटाला होता ही नहीं।

दरअसल, 17 हजार 400 क्विंटल प्याज कम पाए जाने और 8000 क्विंटल प्याज के विनिष्टिकरण तक की प्रक्रिया की निगरानी के लिए अपर कलेक्टर रत्नाकर झा को प्रभारी बनाया गया था। हैरत की बात तो यह है कि प्याज घोटाले की जांच कमेटी में जिन अफसरों को शामिल किया गया उसमें से तीन अफसर तो प्याज खरीदी में ही शामिल थे। जिसके चलते खरीदी की मॉनीटरिंग कर रहे इन अफसरों की जिम्मेदारी पर कोई जांच नहीं हो सकी।

ऐसे समझे

जांच पर टेक्निकल एक्सपर्ट का कहना है कि दरअसल, जब प्याज खरीदी गई तो सबसे पहले मार्कफेड ने प्याज की गुणवत्ता देखकर प्याज खरीदी के लिए ओके रिपोर्ट दी। इसके बाद प्याज मंडी में तुलने के लिए गई। अगर प्याज में कमी पाई गई है तो सबसे पहले मंडी के लोग जिम्मेदार है क्योकि वे खरीदी का 2 प्रतिशत सुरक्षा के लिए लेते है। मंडी में तौल पर जाने के बाद इसकी रसीद दी जाती है, क्या इसमें इन रसीदों और वर्तमान स्थिति का मौका मुआयना किया गया। मंडी में प्याज खाली करने के बाद वजन किया जाता है। गाड़ी के वजन के आधार पर बिलटी के जरिए प्याज खरीदी की जाती है। मार्कफेड से अनुबंध कराने के बाद सहकारी समितियों ने खरीदी की तो सहारिता उपायुक्त को जांच कमेटी में क्यो रखा गया। जब प्याज नीलाम की गई तो संबंधित क्षेत्र के एसडीएम को इसका जिम्मा क्यो दिया गया जो करोंद मंडी में नीलामी के प्रभारी बनाएं गए थे। अगर यह प्याज प्यापारी को बेंची गई तो क्या व्यापारियों से खरीदी गई प्याज और उठाई गई प्याज का हिसाब मांगा गया? उठाई गई प्याज के समय तौल कांटे सही स्थिति में थे या नहीं इसका जांच रिपोर्ट में कहीं जिक्र नहीं है। नापतौल विभाग से तौल कांटों की जांच क्यो नहीं कराई गई। प्याज जब उचित मूल्य की दुकानों में भेजी गई तब और इससे पहले भी खाद्य विभाग की सहभागिता पूर्ण रूप से खरीदी में रही तो जिला खाद्य अधिकारी को प्याज की जांच में क्यो शामिल किया गया जबकि इनकी निगरानी की जिम्मेदारी पर भी जांच की जानी थी।

यह है मामला

राजधानी में 8 जून से लेकर 30 जून तक समर्थन मूल्य में प्याज खरीदी की गई। इस दौरान 8 रुपए प्रति किलो के हिसाब से प्याज खरीदी गई। जिसके चलते करोंद मंडी भोपाल में एक लाख 65 हजार 129 .80 क्विंटल और बैरसिया मंडी में एक लाख 7 हजार 57579 क्विंटल प्याज खरीदी गई। कुल 2 लाख 72 हजार 705.59 क्विंटल प्याज खरीदी गई। 6 जून से प्याज का परिवहन शुरू किया गया। वहीं 23 जून से प्याज की नीलामी शुरू की गई। कुल 1 लाख 59 हजार 203.30 क्विंटल प्याज परिवहन व 58058.50 क्विंटल प्यज नीलाम की गई। एक जुलाई 2017 से उचित मूल्य की दुकान में 30023.98 क्विंटल प्याज प्रदान की गई। इसके बावजूद शेष बची 8001.95 क्विंटल प्याज का विनिष्टिकरण कर दिया गया। इस दौरान जब दोबारा तुलाई की गई तो 17417.93 क्विंटल प्याज कम पाई गई। जिसकी जांच के लिए कलेक्टर सुदाम पी खाडे ने अपर कलेक्टर जीपी माली को सौंपी। 4 अगस्त से शुरू हुई इस जांच को सात दिन में पूरा किया जाना था लेकिन 24 अगस्त तक पूरा किया गया। 20 दिन बाद जो जांच रिपोर्ट बनाकर प्रमुख सचिव खाद्य को सौंपी गई उसमें भी अब सवाल उठने शुरू हो गए है।

इन बिंदुओं पर भी होनी चाहिए थी जांच

- प्याज खरीदी की प्रक्रिया की मॉनीटरिंग कर रहे अफसरों ने किस आधार पर मॉनीटरिंग की।

- उद्यानिकी विभाग के अफसर को जांच कमेटी में शामिल किया जाना था।

- जांच करते वक्त अपर मुख्य सचिव केसी गुप्ता के 6 जून 2017 को जारी किए गए दिशा निर्देशों पर ध्यान दिया जाना था, अगर दिशा निर्देशों को देखा गया तो दी गई छूट का पालन क्यो नहीं किया गया।

- जांच कमेटी में अन्य जिलों से अफसरों को बुलवाया जा सकता था, जितने भी सदस्य रखे गए थे वे किसी न किसी रूप से प्याज खरीदी में शामिल थे।

- जिला प्रशासन के पास दूसरा कोई एसडीएम नहीं मौजूद है, तभी तो एसडीएम जो इस जांच कमेटी में शामिल किए गए है वे प्याज खरीदी की मॉनीटरिंग में शामिल होने के बाद भी कमेटी में रखे गए।

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