प्याज खरीदी में गड़बड़ी, एक हजार करोड़ लगाकर कमाए 170 करोड़ रुपएUpdated: Thu, 03 Aug 2017 08:01 PM (IST)

सरकार ने रिकॉर्ड 8 लाख 74 हजार टन प्याज खरीद तो ली पर अब गड़बड़ियों की परतें खुलने लगी हैं।

वैभव श्रीधर, भोपाल। प्रदेश में किसानों को प्याज की उचित कीमत दिलाने के लिए सरकार ने रिकॉर्ड 8 लाख 74 हजार टन प्याज खरीद तो ली पर अब गड़बड़ियों की परतें खुलने लगी हैं। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो से लेकर आधा दर्जन विभागों की टीमें एक दर्जन से ज्यादा जांचें कर रही हैं।

कहीं, राज्य सहकारी विपणन संघ के अधिकारी कटघरे में हैं तो कहीं नागरिक आपूर्ति निगम और मंडियों के। इसके चलते किसानों का भुगतान भी रोक दिया गया है। उधर, जब प्याज का हिसाब-किताब निकाला तो पता लगा कि लगभग एक हजार करोड़ रुपए लगाने के बाद 170 करोड़ रुपए ही वापस मिले।

बताया जा रहा है कि जिन व्यापारियों को औसत ढाई रुपए किलो के हिसाब से प्याज बेची, उन्होंने इसे स्टॉक बनाकर रख लिया। इसके कारण बाजार में प्याज की आवक घटी और कीमत 15 से 20 रुपए किलोग्राम तक पहुंच गई।

सूत्रों के मुताबिक शाजापुर, उज्जैन, धार, गुना, छतरपुर, शहडोल, दमोह सहित अन्य जिलों में प्याज खरीदी और बिक्री में हुई गड़बड़ियों की जांच शुरू हो गई है। धार के नागदा में किसानों का रिकॉर्ड नहीं मिल रहा है तो उज्जैन, छतरपुर, दमोह में काफी मात्रा में प्याज सड़ गई। शाजापुर और उज्जैन की मंडियों में सरकार ने तीन-चार अधिकारियों की टीम भेजकर जांच कराई है।

नीलामी को मैनेज करने का दावा करने वाले नागरिक आपूर्ति निगम के महाप्रबंधक श्रीकांत सोनी ईओडब्ल्यू की हिरासत में हैं तो मार्कफेड के वरिष्ठ सहायक ओमपाल सिंह को भी पकड़ा गया है। शाजापुर के दो व्यापारी राजेश पाटीदार और नवरतन जैन भी गिरफ्त में हैं। मंडी बोर्ड ने भी अपने सचिव को निलंबित कर दिया है। कई अन्य वे अधिकारी कटघरे में हैं, जिन्हें प्याज खरीदी और नीलामी के काम में लगाया गया था।

सूत्रों के मुताबिक धार के नागदा में सात जुलाई को खरीदी बंद होने के पांच दिन बाद भी एंट्री होती रही। यहां कई किसानों का रिकॉर्ड ही नहीं मिल रहा है। इसके साथ ही यहां खराब प्याज को जमीन में दबाने के लिए बिना शासन की अनुमति भेज दिया गया था, जिसे सूचना मिलने पर प्रशासन ने रुकवाया और पूरे मामले की जांच कराई जा रही है।

खरीदी एजेंसी मार्कफेड (राज्य सहकारी विपणन संघ) के प्रबंध संचालक ज्ञानेश्वर पाटिल ने बताया कि सभी जिलों से प्याज खरीदी, नीलामी और स्टॉक का ब्योरा मांगा गया है। इसके मद्देनजर 1 लाख 22 हजार टन प्याज का भुगतान रोका गया है।

170 करोड़ रुपए में बिकी प्याज

जिस प्याज को सरकार ने किसानों से 710 करोड़ रुपए में खरीदा, उसे बेचकर सरकार के खजाने में मात्र 170 करोड़ रुपए आए। मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि प्याज की औसत कीमत ढाई रुपए के आसपास निकली है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली में दो रुपए किलोग्राम के हिसाब से प्याज बेची गई। जबकि, परिवहन, भंडारण, हम्माली, तुलाई, बारदाना आदि में सरकार का डेढ़ सौ करोड़ रुपए से ज्यादा लगा।

आंतरिक ऑडिट कराएगी सरकार

सरकार ने तय किया है कि पूरी प्याज खरीदी और नीलामी की प्रक्रिया का ऑडिट कराया जाएगा। ये ऑडिट सहकारिता विभाग अपने स्तर पर कराएगा। इसके लिए विभाग ने खरीदी और बिक्री करने वाली एजेंसियों से पूरा रिकॉर्ड मांगा है।

केंद्र ने मांगी रिपोर्ट

प्याज खरीदी में हुई अनियमितताओं को लेकर केंद्र ने प्रदेश सरकार से रिपोर्ट मांगी है। केंद्रीय कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग ने प्याज खरीदी को लेकर उठ रहे सवालों को लेकर प्रतिवेदन मांगा है। इसके मद्देनजर सहकारिता विभाग ने मार्कफेड के प्रबंध संचालक को पत्र लिखकर जानकारी मांगी है।

उत्पादन से बीस गुना अधिक कैसे खरीदी गई प्याज: कांग्रेस

भोपाल। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता केके मिश्रा ने आरोप लगाया है कि सरकारी दर पर खरीदी गई प्याज में 750 करोड़ रुपए का भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि प्याज के उत्पादन से करीब बीस गुना ज्यादा प्याज की खरीदी हो गई, यह सब कैसे हुए। इस भ्रष्टाचार की वजह राजनीतिक संरक्षण, नागरिक आपूर्ति निगम, मार्कफेड व बिचौलियों की मिलीभगत है।

मिश्रा ने इसकी सीबीआई जांच की मांग की है। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता ने खाद्य मंत्री ओमप्रकाश धुर्वे और नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष डॉ. हितेष बाजपेयी की भूमिका को संदिग्ध बताया है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि मप्र में इस वर्ष प्याज की बोवनी का कुल रकबा कितना है? रकबे के आधार पर प्रदेश में प्याज का औसत उत्पादन क्या है और उत्पादन कितना हुआ? इन आंकड़ों से यह सामने आता है कि प्याज की खरीदी उत्पादन से 20 गुना अधिक हो गई है।

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