आसान नहीं हैं CD में हुई छेड़छाड़ को पकड़ना, यहां होती है जांचUpdated: Sat, 28 Oct 2017 08:27 AM (IST)

चीटिंग के लिए विडियो में टैंपरिंग करने पर पांच साल की सजा और अदालत से तय जुर्माना दोनों सजा हो सकती है।

रायपुर। ऑडियो- वीडियो सीडी से हुई छेड़छाड़ (टैंपरिंग) को पकड़ पाना इतना आसान नहीं है। वह भी तब जब छत्तीसगढ़ में इसकी कोई सुविधा ही नहीं है। राज्य के फार्रेंसिक लेब में साइबर क्राइम से जुड़े मामलों की जांच की कोई सुविधा नहीं है। ऐसे सीडी जांच के लिए हैदराबाद स्थित लैब भेजनी पड़ती है।

वहां से रिपोर्ट आने में न्यूनतम एक महीने का वक्त लगता है। फार्रेंसिक विभाग के डॉयरेक्टर (डीजी) एमडब्ल्यू अंसारी ने कहा कि राज्य में साइबर क्राइम के जांच की कोई सुविधा नहीं है।

प्रथम दृष्टिया बता पाना मुश्किल

शुक्रवार को कांग्रेस की तरफ से जारी सीडी को लेकर नईदुनिया ने दो साइबर एक्सपर्ट्स से बात की। उनका कहना है कि क्लिप देखकर यह बता पाना कठिन है कि टैंपरिंग हुई है या नहीं।

कोर्ट में साबित करना मुश्किल

पुलिस अफसरों के अनुसार सीडी टैंपरिंग के मामलों की जांच जितनी कठिन है, कोर्ट में साबित करना उससे ज्यादा मुश्किल। प्रदेश में अब तक हुए ज्यादातर बड़े और चर्चित सीडी कांड में आरोपी कोर्ट साबित नहीं हो पाए।

छेड़छाड़ करना भी कठिन

डिजिटल विडियो के साथ छेड़छाड़ मुश्किल से होती है, पर असंभव नहीं। फॉरेंसिक विशेषज्ञों के अनुसार आम आदमी के लिए टैंपरिंग का पता लगा पाना संभव नहीं है। किसी भी विडियो में तीन डेट्स होती हैं।

एक उसके क्रिएशन की, दूसरी एक्सेस या ओपनिंग की और तीसरी मॉडिफिकेशन की। लोग सिर्फ इन्हीं तारीखों को देखकर कुछ हद तक अंदाजा लगा सकते हैं। विडियो से छेड़छाड़ का पता केवल फरेंसिक लैब्स में विशेष सॉफ्टवेयर्स की मदद से ही लगाया जा सकता है।

ऐसे होती है जांच

इटली की एम्डा कंपनी ने ऐसे कुछ सॉफ्टवेयर्स बनाए हैं। एक सेकंड के विडियो में 25 फ्रेंम होते हैं। इन फ्रेंम्स से एक सेकंड का सीन बनता है। सॉफ्टवेयर्स से एक-एक कर 25 फ्रेंम चेक किया जाता है, तब पता लगता है कि टैंपरिंग हुई या नहीं।

ऐसे आता है पकड़ में

विडियो से छड़छाड़ हुई होगी तो फ्रेम्स की चेकिंग के दौरान फ्रेम्स का रेजॉलूशन, उसके पिक्सल्स, कंट्रास्ट आदि में एकदम बदलाव आने लग जाएगा। रौशनी की दिशा, छाया, यहां तक कि रंगों में भी फर्क दिखाई देने लग जाएगा।

कई बार दो फ्रेम्स में पीछे का बैकग्राउंड भी अलग-अलग पाए जाने के साथ-साथ एक सेकंड में फ्रेम्स की संख्या में अंतर आने लगता है। चेकिंग के दौरान हर लेयर देखी जाती है। गर्दन व बाकी शरीर मैच नहीं करता तो गड़बड़ी पता लग जाती है।

क्या है कानून

क्रिमिनल लॉयर मो. अजीज हुसैन के अनुसार ऐसे मामलों में एविडेंस ऐक्ट की धारा 67-ए के तहत मामला दर्ज होता है। विडियो से छेड़छाड़ के साधारण मामलों में दोषी पाए जाने पर तीन साल की सजा और पांच लाख का जुर्माना हो सकता है। चीटिंग के लिए विडियो में टैंपरिंग करने पर पांच साल की सजा और अदालत से तय जुर्माना दोनों सजा हो सकती है।

संबंधित खबरें

जरूर पढ़ें

FOLLOW US

Copyright © Naidunia.