जिस घड़ी-नक्षत्र में पैदा हुए धन्वंतरि, वैसा ही संयोग आजUpdated: Fri, 28 Oct 2016 08:52 AM (IST)

अवतरण काल के दौरान ग्रह नक्षत्रों की जैसी स्थिति थी, कुछ वैसा ही संयोग शुक्रवार को पड़ रहे धनतेरस पर बन रहा है।

रायपुर, निप्र। वेद पुराणों के अनुसार देवताओं व राक्षसों द्वारा नाग को रस्सी बनाकर जब समुद्र मंथन किया गया, तब भगवान धनवंतरि अमृत कलश लेकर अवतरित हुए थे। अवतरण काल के दौरान ग्रह नक्षत्रों की जैसी स्थिति थी, कुछ वैसा ही संयोग शुक्रवार को पड़ रहे धनतेरस पर बन रहा है।

इस महासंयोग में जो भी वस्तु खरीदी जाएगी, वह अक्षय साबित होगी और घर-परिवार में सुखसमृद्धि बढ़ेगी। ज्योतिषी डॉ.दत्तात्रेय होस्केरे के अनुसार भगवान धनवंतरि समुद्र से जब अमृत से भरा चन्द्र कलश लेकर प्रकट हुए थे। उस दौरान चन्द्र प्रधान हस्त नक्षत्र और अमृत योग था।

इस साल 28 अक्टूबर 2016 को कार्तिक

त्रयोदशी तिथि पर भी चन्द्र प्रधान हस्त नक्षत्र व अमृत योग पड़ रहा है, जो कि दुर्लभ संयोग माना गया है। चन्द्र प्रधान नक्षत्र का संबंध चांदी से होता है और चूंकि धनवंतरि चांदी कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए धनतेरस पर चांदी की धातु खरीदने का महत्व है। इसी दिन भाग्येश बुध जो है वह लग्न में सूर्य के साथ होकर बुधादित्य योग बना रहा है, जो कि अक्षयता का योग है अर्थात जो भी वस्तु खरीदी जाएगी वह अक्षय को प्राप्त होगी।

यमराज के निमित्त दीप जलाने से अकाल मृत्यु नहीं- महामंडलेश्वर राजेश्वरानंद सरस्वती के अनुसार ऑआयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के जन्मदाता धन्वंतरि जयंती पर नए बर्तन खरीदकर पकवान रखकर धनवंतरि को अर्पित किया जाता है। इस दिन यमराज को दीपदान करने से अकाल मृत्यु नहीं होती। रात्रि में मुख्य द्वार पर यमराज के निमित्त एक दीप जलाना चाहिए। धनतेरस पूजा का मुहूर्त शाम 5.35 से 6.20, प्रदोष काल शाम 5.35 से 8.11 और वृषभ काल शाम 6.35 से 8.20 तक उत्तम है।

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