यहां सुबह डब्बा लेकर बाहर गए तो वानर टोली बजाती है सीटीUpdated: Mon, 04 Dec 2017 12:46 AM (IST)

सख्ती से आदत में सुधार लाने की यह कोशिश करीब एक सप्ताह पहले शुरू की गई।

कोरबा । स्वच्छ शहर मिशन के तहत कहीं जुर्माने का प्रावधान है, तो कई जगह सूचना बोर्ड लगाए जा रहे। विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा। इसी कड़ी में दीपका से लगे ग्राम झाबर में लोगों को सुधारने एक अनोखी जुगत लगाई है।

अब भी बंद कमरे की अच्छी आदत से दूर है, तो सुबह-शाम डब्बा लेकर खुले में जाते हुए दिखने पर उसके पीछे गांव के छोटे बच्चे लग जाते हैं और सीटी बजाते हैं। ऐसा करने से उन्हें एहसास कराया जाता है कि आगे से वे खुले में न जाएं और अपनी आदत जितनी जल्दी हो बदल डालें।

केंद्र शासन की मुहिम पर पिछले तीन साल से प्रशासन स्वच्छता अभियान का नारा लेकर शहर से लेकर गांव-गांव में घूम रहा। हर घर में शौचालय निर्माण के लिए निर्धन तबके को निःशुल्क तो अन्य वर्ग को सबसिडी पर शौचालय निर्माण करने मदद पहुंचाई गई।

जहां शौचालय निर्माण पर करोड़ों पानी की तरह बह गए, जागरूकता के नाम पर भी न जाने कितनी राशि फूंक दी गई। लाख कोशिशों के बाद भी लोगों की आदत में सुधार लाने की सारी कवायद उस वक्त बेकार साबित हो जाती है, जब कोई सुबह के वक्त डब्बा लेकर बाहर की ओर जाता दिखाई दे जाता है।

विनम्रतापूर्वक जागरूक करने की कवायद भी जब शत प्रतिशत सफलता की राह मुश्किल करती दिखी, तो अब ग्राम झाबर में दंड के साथ अनोखे ढंग से सुधार लाने की कोशिश की जा रही।

इसके तहत पिछले एक सप्ताह से गांव के छोटे बच्चे टोलियां बनाकर खुले में शौच करने जा रहे लोगों को देख सीटी बजाना शुरू कर देते हैं। बच्चे संबंधित ग्रामीण के घर से निकलते ही पीछे लग जाते हैं और जोरदार आवाज में सीटियां बजाकर उसे अपनी आदत में सुधार लाने की सीख देते हैं।

सप्ताहभर पहले गठित की गई टीम

सख्ती से आदत में सुधार लाने की यह कोशिश करीब एक सप्ताह पहले शुरू की गई। इसके तहत खुले में शौच के चिन्हांकित क्षेत्रों में जाकर लोगों को सुधार लाने बच्चों को जिम्मेदारी दे दी गई है। इसके लिए बकायदा बच्चों को मिलाकर एक वानर टोली का गठन भी किया गया है, जिनकी टीम सुबह व शाम के वक्त घूमती दिखाई देती है।

इस दौरान उनकी टोली में शामिल बच्चे क्षेत्र की निगरानी करते हैं। जहां कहीं कोई अपने घर या मोहल्ले से लोटा लेकर निकलता है, बच्चे उसे देखकर सीटी पर सीटी बजाना शुरू कर देते हैं।

इस तरह वे न केवल शर्मिंदा होते हैं, मासूम बच्चों की इस शैतानी पर गुस्सा होने की बजाय खुद हंस देते हैं। इतना ही नहीं, इस हकरत को दोबारा न दोहराने का संकल्प भी उठाते हैं, क्योंकि इससे वे अपने बच्चों के आने वाले कल को स्वस्थ व स्वच्छ बनाने भागीदार बन रहे हैं।

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