अफ्रीका के सबसे ऊंचे शिखर पर तिरंगा लहराएंगे हेमंतUpdated: Wed, 06 Dec 2017 04:04 AM (IST)

सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहरा चुके दीपका-गेवरा के हेमंत गाड़ेश्वर पटेल अब अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो पर तिरंगा फहराने जा रहे हैं।

कोरबा। भारत के अनेक राज्यों में पर्वतों की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहरा चुके दीपका-गेवरा के हेमंत गाड़ेश्वर पटेल अब अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो पर तिरंगा फहराने जा रहे हैं। जिले के युवा पर्वतारोही ने बताया कि पृथ्वी पर सातों महाद्वीप में छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करना ही उनके जीवन का लक्ष्य है।

उन्होंने बताया कि अब तक जो भी उन्होंने प्रयास किए हैं, उसके लिए पिता ने हर संभव आर्थिक प्रोत्साहन दिया है। अफ्रीका महाद्वीप स्थित अगले मिशन को सफल करने उन्हें राज्य शासन से सहायता की दरकार है, ताकि वे कोरबा व छत्तीसगढ़ का नाम विश्व स्तर पर ऊंचा कर सके।

मंगलवार को प्रेस क्लब तिलक भवन में पत्रकारों से रूबरू होते हुए हेमंत ने अपने अगले पर्वतारोहण मिशन के बारे में कई बातें साझा की। उन्होंने कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बाद आर्मी ज्वाइन करने का लक्ष्य बनाया था। इस जज्बे के साथ आरंभ करते हुए दुर्गम पहाड़ी रास्तों से ऊंचाई तय करने अभ्यास शुरू किया। भारतीय पर्वतरोहण संस्थान (आईएमएफ) से मान्यता प्राप्त 5 प्रमुख प्रशिक्षण संस्थाओं में से 3 में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हेमंत ने वर्ष 2013 में पहली बार उत्तराखंड में डोकरीयानी नामक (4053 मीटर) चोटी पर तिरंगा फहराया।

उसके बाद पर्वतरोहण की सिलसिला आगे बढ़ता ही गया। हेमंत ने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, जम्मू एंड कश्मीर और लेह-लद्दाख की ऊंची चोटियों पर राज्य का नाम रोशन किया है। ये सभी सफलताएं हेमंत ने स्वयं के संसाधनों व परिवार के सहयोग से अर्जित किया। हेमंत का अगला लक्ष्य अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो (समुद्र तल से ऊंचाई 5895 मीटर) पर तिरंगा फहराने का है। इसके लिए वे 20 दिसंबर को रवाना होंगे। वार्ता के दौरान चरामेती फाउंडेशन के फाउंडर प्रशांत महतो व हेमंत के पिता सुकरूलाल गाड़ेश्वर पटेल मौजूद रहे।

मेरे पास 70 हजार, जरूरत 5 लाख की

इस लक्ष्य की प्राप्ति में आर्थिक तंगी आड़े आ रही है। अमूमन 4 से 5 लाख का खर्च इसमें आएगा। अपने खुद के बूते हेमंत के लिए यह खर्च कर पाना संभव नहीं, लेकिन छत्तीसगढ़ प्रदेश में पर्वतरोहण को प्रोत्साहन नहीं मिलने के कारण यह सपना टूटता दिख रहा है। हेमंत बताते है कि आपसी सहयोग से उसके पास मात्र 70 हजार ही है। जिसके बूते किलिमंजारो पर वह अपना राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहरा पाएगा। पर्वतरोहण के साथ समाज सेवा के क्षेत्र में कार्यरत हेमंत ने पर्वतों में जाकर भारतवासियों से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और जरूरतमंद छात्रों के लिए अपनी किताबें दान करने की गुजारिश की है। चरामेति फाउंडेशन में राज्य क्रीड़ा प्रभारी के रूप में वे बच्चों को निःशुल्क पर्वतरोहन व खेल के बारे में प्रशिक्षण देते रहते हैं।

कई राज्यों में सरकार करती है प्रोत्साहित

हेमंत ने कहा कि प्रदेश सरकार इस साहसिक कॅरियर को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य में इंस्टीट्यूट की स्थापना करे। इस क्षेत्र में जाने वालों को आर्थिक सहायता व संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। पर्वतारोहण कर अपना जीवन संकट में डालने और जिले, राज्य व देश का नाम रोशन करने वाले साहसी युवाओं को शासन के प्रोत्साहन की जरूरत है। जिस प्रकार खेलकूद व एनसीसी में प्राथमिकता दी जाती है, उसी प्रकार पर्वतारोहण को भी प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। देश के अन्य राज्यों में हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, झारखंड ऐसे राज्य है, जहां पर्वतरोही को सरकारी नौकरी का लाभ दिया जाता है। इन्हें निजी उद्योगों और कंपनियों के मालिक भी इन्हें सहयोग करते हैं।

माउंट एवरेस्ट है सबसे कठिन लक्ष्य

हेमंत का कहना है कि युवाओं के लिए पर्वतरोहण को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़ माउंटेनियरिंग अकादमी की जरूरत, जो सरकारी मदद के बिना संभव नहीं है। अपेक्षित शासकीय सहयोग मिला तो इसी साल दिसंबर 2017 में पूरे उत्साह के साथ अफ्रीका के किलिमंजारो पर्वत पर शान से तिरंगा लहराएगा। इसके बाद माउंट एवरेस्ट पर छत्तीसगढ़ व कोरबा की शान बढ़ाने का इरादा है। पर्वतरोहण में राष्ट्रीय स्तर पर कोरबा व छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित कर चुके हेमंत ने बताया कि 7 महाद्वीप में एशिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8850 मीटर, समुद्र तल से ऊंचाई) पर छत्तीसगढ़ से यहां कोई नहीं पहुंचा है। इसके लिए बहुत कठिन तैयारी करनी होती है, यह एक बड़ा लक्ष्य है।

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