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5 किमी दूर है खदान, लेकिन कागजों पर 425 किमी दौड़ रही अफसर की गाड़ीUpdated: Tue, 13 Feb 2018 04:04 AM (IST)

अब प्रधानमंत्री एवं कोयला मंत्री को पत्र लिखा गया है। इस मामले से अफसरों की नींद उड़ गई है।

कोरबा। बंगले से खदान की दूरी महज 5 किलोमीटर होने के बाद भी कुसमुंडा महाप्रबंधक का चार पहिया वाहन प्रतिदिन 375 से 425 किलोमीटर चल रहा है। शिकायत के बाद भी सतर्कता विभाग ने कार्रवाई नहीं की। अब प्रधानमंत्री एवं कोयला मंत्री को पत्र लिखा गया है। इस मामले से अफसरों की नींद उड़ गई है।

सूचना के अधिकार के तहत निकाली गई जानकारी में यह तथ्य उजागर हुआ। एसईसीएल कुसमुंडा एरिया में पदस्थ महाप्रबंधक के दो वाहनों के परिचालन की जानकारी कोयला उद्योग कामगार संगठन के अध्यक्ष दर्शन सिंह चावला ने मांगी।

नवंबर 2015 में वाहन की लागबुक की जानकारी मांगे जाने पर प्रबंधन ने छह माह बाद उत्तर दिया गया। इस पर चावला ने एसईसीएल के सतर्कता विभाग के अफसर जी जनार्दन को पत्र लिख कर जांच करने की मांग की, पर किसी भी विभाग ने सकारात्मक पहल नहीं की।

इसके बाद उन्होंने पुनः महाप्रबंधक के दोनों वाहन की जानकारी अगस्त 2017 में मांगी, पर प्रबंधन ने टालमटोल की नीति अपनाते हुए दिसंबर 2017 में जानकारी दी। वाहन का परिचालन रिपोर्ट सामने आने पर श्री चावला ने प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय कोयला मंत्री को पत्र लिख कर कहा कि कुसमुंडा क्षेत्र में पदस्थ महाप्रबंधक यूके सिंह अपने वाहनों का दुरूपयोग कर रहे हैं।

उनके बंगला से खदान की दूरी महज 5 किलोमीटर है, पर उनके वाहन प्रतिदिन 375 से 425 किलोमीटर चल रहे हैं। जीएम के पास दो वाहन इनोवा सीजी 12 एपी 9999 तथा सीजी 12 एक्यू 6999 हैं तथा दो वाहन इनोववा क्रमांक सीजी 12 एपी 9400 तथा मारुति सियाज कार सीजी 12 एक्यू 9700 जीएम पुल के नाम आवंटित हैं।

यानी चार वाहन का उपयोग कर रहे हैं। लॉगबुक समेत संपूर्ण जानकारी सतर्कता विभाग को सौंपी गई, पर विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। ठेका पद्धति से किराए पर लिए गए वाहन को प्रतिमाह 3 हजार किलोमीटर चलाने की अनुमति है, पर वाहन 5 हजार किलोमीटर चल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी कोयला उत्खनन करने वाली परियोजना में शामिल कुसमुंडा एरिया के महाप्रबंधक द्वारा वाहनों के परिचालन में बरती जा रही अनियमितताओं की जांच करा उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। जानकारों का कहना है कि शिकायत मिलने पर पीएमओ कार्यालय ने इसे गंभीरता से लिया है और कोल इंडिया को पत्र लिखा है। इसकी जानकारी स्थानीय स्तर पर अफसरों को मिलते ही हड़कंप मच गया है।

दोनों वाहन में समान रीडिंग

महाप्रबंधक को उपलब्ध कराए गए वाहन में रीडिंग एक समान भरी गई है। अप्रैल 2017 में इनोवा एवं स्कार्पियो कई दिन एक समान चली है। यानी 5 अप्रैल को इनोवा 198 किलोमीटर चली है, तो स्कार्पियों के लॉगबुक में भी 198 किलोमीटर दर्ज है। इसी तरह इस माह दस दिन तक दोनों वाहन एक समान चले हैं। पूरे माह में इनोवा 4894 किलोमीटर चली है, तो स्कार्पियो 4989 किलोमीटर चली।

बिलासपुर मुख्यालय, दौरा रायपुर का

महाप्रबंधक नवंबर 2015 में तीन बार रायपुर दौरे पर रहे। चावला ने कहा कि आखिर रायपुर में महाप्रबंधक का क्या काम है, जबकि मुख्यालय बिलासपुर में है। इस माह वाहन क्रमांक सीजी 12 एएम 5010 कुल 3450 किलोमीटर चली तो वाहन क्रमांक सीजी 12 एएल 2220 की रीडिंग 4104 किलोमीटर है। लॉगबुक में बंगला से खदान की दूरी कभी 7 किलोमीटर से लेकर 174 किलोमीटर तक दर्ज है।

- महाप्रबंधक ठेका पद्धति से किराए पर लिए वाहन का दुरूपयोग कर रहे हैं। सूचना के अधिकार तहत जानकारी मांगने पर वित्त विभाग ने रिकार्ड गायब होने की जानकारी दी। बाद में उपलब्ध गई जानकारी के आधार पर पीएमओ तथा केंद्रीय कोयला मंत्री को पत्र लिखा गया है। संभवतः इस पर जांच के आदेश हुए हैं। - दर्शन सिंह चावला, अध्यक्ष, कोयला उद्योग कामगार संगठन

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