'चार साल में गायब हो जाएंगे एटीएम, क्रेडिट व डेबिट कार्ड'Updated: Sat, 01 Apr 2017 06:16 PM (IST)

पिछले साल नवंबर में नोटबंदी के बाद देश तेजी से कैशलेस होने की तरफ बढ़ रहा है।

नई दिल्ली। देश में बड़ी तेजी से नई-नई तकनीकें अमल में आ रही हैं। लोग डिजिटल पेमेंट को धड़ाधड़ अपनाते जा रहे हैं। भुगतान के लिए मोबाइल वॉलेट व बायोमीट्रिक के विकल्प उपलब्ध हो रहे हैं। इन सब को देखते हुए जल्द ही डेबिट और क्रेडिट कार्ड के साथ ही एटीएम भी गायब हो जाएंगे।

नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने यह संभावना जताई है। अमिताभ शुक्रवार को उद्योग चैंबर पीएचडीसीसीआइ में ट्रेड एंड इंवेस्टमेंट फैसिलिटेशन सर्विस (टीआइएफएस) के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे।

कांत ने कहा कि तकनीकी भारत के विकास में अहम भूमिका निभाएगी। बीते साल नवंबर में नोटबंदी के बाद देश तेजी से कैशलेस की तरफ बढ़ रहा है। यह दीगर है कि अब भी डिजिटल की बजाय कैश पर निर्भरता ज्यादा है।

तमाम लोगों के पास बैंक खाते हैं और उनसे जुड़े डेबिट कार्ड के अलावा क्रेडिट कार्ड का चलन भी बीते कुछ वर्षों में बढ़ा है। एटीएम की सुविधा के चलते बैंक जाने की जरूरत कम हो चुकी है। लेकिन डेबिट और क्रेडिट कार्ड के अलावा एटीएम के भी अब गिने-चुने ही दिन बचे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत में फिजिकल बैंकिंग लगभग खत्म ही है। बैंक बेहद तेज गति से बड़े पैमाने पर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं। अगले तीन-चार सालों में मोबाइल वॉलेट और बायोमीट्रिक मोड के जरिये डिजिटल ट्रांजेक्शन में खासी बढ़ोतरी होगी। इससे वर्ष 2020 तक क्रेडिट व डेबिट कार्ड और एटीएम बिल्कुल गायब हो जाएंगे।

वैश्वीकरण बनेगा मददगार

कांत के मुताबिक अमेरिका और यूरोप में लोगों की औसत आयु बढ़ रही है। यानी इनकी आबादी लगातार बुढ़ापे की ओर बढ़ रही है। इसके उलट भारत लगातार जवान होता जा रहा है। इसके साथ ही देश में काम व कारोबार करना सुगम बनाया गया है। सरकार ने इसके लिए बीते साल 1200 बेकार कानूनों को खत्म किया है।

ऐसे कानूनों को खत्म करने का काम भी जारी रहेगा, जो विकास की रफ्तार पर ब्रेक लगाते हों। भारतीय अर्थव्यवस्था तकरीबन 7.6 फीसद की गति से बढ़ रही है। भारत को विकास के ट्रैक पर विजेता की तरह दौड़ना है। भारत 24 यूरोपीय देशों से बड़ा है।

वह लगातार वैश्वीकरण की तरफ आगे बढ़ेगा। इसके जरिये देश ऐसी दुनिया भर से निवेश खींचने वाली अर्थव्यवस्था के रूप में उभरेगा। ग्रोथ को तेज कर आर्थिक गतिविधियों का ग्लोबल हब बनेगा। अमेरिका में भले ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी अर्थव्यवस्था के लिए संरक्षणवाद की नीति अपना रहे हों, मगर भारत में ऐसी कोई बात नहीं है।

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