कुत्ते-बिल्ली व घास खत्म, मिट्टी खाने को मजबूर यहां के लोगUpdated: Fri, 08 Jan 2016 01:19 PM (IST)

हालात कुछ इस कदर बदतर हो गए हैं कि लोग भूख की वजह से पत्ते व घास के बाद मिट्टी तक खाने को मजबूर हैं।

वाशिंगटन। दुनिया के खूंखार आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के काली छाया के कारण सीरिया की हालत बदतर हो गई है। कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट में कहा गया है कि वहां भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। हालात कुछ इस कदर बदतर हो गए हैं कि लोग भूख की वजह से पत्ते व घास के बाद मिट्टी तक खाने को मजबूर हो गए हैं।

अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, सीरिया के मडाया शहर के अबु अब्दुल रहमान को चार दिनों से कुछ खाने को नहीं मिला। इससे वह और उसके परिवार के सदस्य काफी कमजोर हो गए। यहां तक की रहमान चलने-फिरने की स्थिति में भी नहीं है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार सीरिया सरकार मडाया में मानवीय सहायता पहुंचाने को राजी हो गई है।

सीरिया के मडाया क्षेत्र में भुखमरी व खाने के अभाव में अबतक दो लोगों की मौत हो चुकी है। इतना ही नहीं कस्बे में अब बिल्ली-कुत्ते भी दिखने कम हो गए हैं। इसका कारण यह है कि स्थानीय लोगों ने उन्हें भी मारकर खाना शुरू कर दिया है। साथ ही साथ यहां पेड़ों पर पत्ते दिखने कम हो गए हैं, जो भूख मिटाने के साधन बने। ऐसे में लोगों ने अब मिट्टी खाना शुरू कर दिया है। लेबनान की सीमा से 25 किमी की दूरी पर मडाया कस्बा है, जो पिछले साल की जुलाई से ही विद्रोहियों व सरकारी बलों के संघर्ष का केंद्र बन हुआ है।

ब्रिटिश स्थित एक मॉनिटरिंग ग्रुप के अनुसार, मडाया कस्बे में कम से कम 300 बच्चे कुपोषण से ग्रस्त हैं, जबकि स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि वहां के 40 हजार लोग भोजन व दवा से वंचित हैं। अल जजीरा ने यूएन रिफ्यूजी एजेंसी की प्रवक्ता मेलिसा फ्लेमिंग के हवाले से लिखा है कि 15 नगरों के कम से चार लाख लोग संघर्ष से इस तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं। एक डॉक्टर के हवाले से अल जजीरा ने लिखा है कि लोग घास भी खा रहे हैं।

हालात इतने बदतर हो गए हैं कि दवा, खाना के साथ बहुत सारे लोगों के पास छत भी नहीं है। ऐसे में उन्हें जीवन-यापन में दिक्कत होती है। लोग प्लास्टिक जलाकर खुद को गर्म रखने की कोशि में रहते हैं।

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन के एक प्रतिनिधि के हवाले से बताया गया है कि बुधवार तक इस कस्बे की घेराबंदी के कारण कम से कम 23 लोगों को मौत हो गई है, जिसमें बच्चें भी शामिल हैं। सीरिया में पिछले पांच साल के संघर्ष में अबतक ढाई लाख लोग मारे गए हैं। ऐसे में अब यहां शांतिप्रयास में लगे लोगों की नजर इस मुद्दे पर जेनेवा में होने वाली 25 जनवरी की बैठक पर है।

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, रेडक्रास ने कहा है कि वहां दवा व खाने की चीजें खत्म हो गई हैं। इस इलाके की ज्यादा तसवीरें भी सामने नहीं आ पा रही हैं। वहां सहायता सामग्री पहुंचाने में इसलिए दिक्कत हो रही है, क्योंकि हिजबुल्ला ने घेराबंदी कर रखी है। दरअसल, हिजबुल्ला नहीं चाहता कि इस्लामिक स्टेट के लड़ाके लेबनान में दाखिल हों। वहां की सहायता एजेंसी इस जटिल परिस्थिति से परेशान हैं।

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