जाधव को फांसी हुई तो इसे मानेंगे सुनियोजित हत्याः भारतUpdated: Mon, 10 Apr 2017 03:20 PM (IST)

इस फैसले के बाद भारत ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि अगर फांसी हुई तो इसे सुनियोजित हत्या माना जाएगा।

नई दिल्ली/इस्लामाबाद। पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को फांसी की सजा सुनाकर एक बार फिर भारत को भड़का दिया है। जाधव को भारतीय खुफिया एजेंसी "रॉ" के एजेंट के रूप में बलूचिस्तान और कराची में विद्रोह भड़काने का दोषी बताया गया है। पाक सेना कोर्ट के इस फैसले के बाद भारत ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि अगर फांसी हुई तो इसे सुनियोजित हत्या माना जाएगा।

सोमवार देर शाम को प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने सीनेट को बताया कि कानून के मुताबिक जाधव को मौत की सजा सुनाई गई है।

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इस पर भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित को तलब कर नाराजी जताई। बासित को डिमार्श (कूटनीतिक विरोध पत्र) सौंपकर कहा कि यदि जाधव को फांसी दी गई, तो भारत इसे सुनियोजित हत्या मानेगा। भारत ने 11 पाकिस्तानी कैदियों की रिहाई भी रोक दी है।

कानून का पालन नहीं किया गया

विदेश सचिव एस जयशंकर ने पाक उच्चायुक्त बासित से कहा कि जाधव को मूलभूत कानून व न्याय प्रक्रिया का पालन किए बगैर सजा सुनाई गई है। विरोध पत्र में भारत ने कहा कि जाधव का पिछले साल ईरान से अपहरण किया गया था।

पाकिस्तान में उनकी मौजूदगी को विश्वसनीय ढंग से साबित नहीं किया गया। अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार भारतीय उच्चायुक्त ने जाधव से मुलाकात का 13 बार आग्रह किया। एक बार भी नहीं मिलने दिया गया। भारतीय उच्चायुक्त को एक बार भी नहीं बताया कि जाधव पर मुकदमा चल रहा है।

पाक सेनाध्यक्ष ने की पुष्टि

सैन्य अदालत द्वारा 46 वर्षीय जाधव को सभी आरोपों का दोषी मानने के बाद पाक सेनाध्यक्ष जनरल कमर बाजवा ने सोमवार को फांसी की सजा की पुष्टि कर दी। पाक सेना की मीडिया विंग ने एक बयान जारी कर बताया कि जाधव पर पाक आर्मी एक्ट-1952 और सरकारी गोपनीयता कानून के तहत मुकदमा चलाया गया था। उन्हें कानूनी बचाव के लिए वकील भी उपलब्ध कराया गया था।

पाक ने लगाए मनगढ़ंत आरोप

- 3 मार्च, 2016 को गिरफ्तारी के वक्त जाधव भारतीय नौसेना में कमांडर थे।

- मजिस्ट्रेट के समक्ष उन्होंने रॉ का एजेंट होने की बात मान ली।

- जाधव ने नाम बदलकर हुसैन मुबारक पटेल कर लिया था।

- रॉ ने बलूचिस्तान और कराची में जासूसी के लिए भेजा था।

- उन्हें ईरान के रास्ते बलूचिस्तान पहुंचने पर गिरफ्तार किया गया था।

भारत ने ठुकराए थे आरोप

- जाधव का सरकार या किसी भारतीय खुफिया एजेंसी से संबंध नहीं था।

- नौसेना से उन्होंने समय-पूर्व सेवानिवृत्ति ले ली थी।

- वह व्यापार के सिलसिले में ईरान, अफगानिस्तान व पाकिस्तान जाते थे।

- पाक सेना ने पूछताछ का जो वीडियो जारी किया, उसमें जाधव काफी सहमे नजर आ रहे थे।

- जाधव से भारतीय दूतावास के अफसरों के समक्ष पूछताछ का आग्रह किया था, जिसे नहीं माना गया।

कब क्या हुआ

- 24 मार्च, 2016 : पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव को गिरफ्तार करने की घोषणा की। हालांकि, पकड़े जाने की खबरें तीन मार्च को ही मिल गई थी।

- 26 मार्च, 2016 : पाकिस्तान के विदेश विभाग ने भारतीय उच्चायुक्त को तलब किया और बयान जारी किया। कथित रूप से जाधव के गैरकानूनी रूप से प्रवेश और विध्वंसकारी गतिविधियों में शामिल होने पर विरोध जताया।

- 26 मार्च, 2016 : भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि जाधव का सरकार से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने समय से पहले ही नौसेना से रिटायरमेंट ले ली थी और अपना व्यापार कर रहे थे।

- 29 मार्च, 2016 : जाधव के इकबालिया बयान का एक वीडियो पाकिस्तान ने जारी किया। इसमें उनको यह कहते हुए देखा जा सकता है कि वह भारतीय नौसेना के अधिकारी हैं और रॉ के लिए काम करते हैं। भारत ने इसकी प्रमाणिकता पर सवाल खड़े किए। करीब छह मिनट के वीडियो में लगभग सौ कट थे।

- मार्च 2016 : इस्लामाबाद दौरे पर गए ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल राहिल शरीफ से भारतीय जासूस की गिरफ्तारी के बारे में भी बातचीत होने से इन्कार किया।

- अप्रैल 2016 : पाकिस्तान में जर्मनी के राजदूत रहे डॉ. गुंटर मुलक के अनुसार, जाधव को तालिबान ने पकड़ा और बाद में उसे आइएसआइ के हाथों बेच दिया।

- अप्रैल 2016 : बलूचिस्तान की सरकार ने जाधव के खिलाफ एफआइआर दर्ज की। इसमें आतंकवाद और विध्वंस के आरोप लगाए गए।

- सात दिसंबर, 2016 : पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के सलाहकार सरताज अजीज ने सीनेट की एक समिति से कहा कि जाधव पर दिया गया डॉजियर केवल कुछ बयान भर हैं। उस पर पर्याप्त सुबूत नहीं दिए गए हैं।

- तीन मार्च, 2017 : पाकिस्तानी सीनेट को संबोधित करते हुए सरताज अजीज ने कहा कि जाधव को किसी भी हालत में भारत को नहीं सौंपा जाएगा।

- चार अप्रैल, 2017 : एक गुप्त सुनवाई में जाधव को मौत की सजा सुनाई गई।

सरबजीत की बहन ने कहा, बचाएं कुलभूषण की जान

2013 में लाहौर जेल में मारे गए सरबजीत की बहन दलबीर कौर ने सरकार से अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में जाने समेत हरसंभव कदम उठाने और कुलभूषण की जान बचाने का आग्रह किया है। चंडीगढ़ में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, "जाधव के परिवार का दर्द मैं समझ सकती हूं।"

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