बेटी के फर्जी दस्तावेज से फंसे पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफUpdated: Mon, 10 Jul 2017 06:04 PM (IST)

पनामा पेपर लीक मामले में बेटी मरियम के फर्जी दस्तावेज से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की कुर्सी खतरे में पड़ गई है।

इस्लामाबाद। पनामा पेपर लीक मामले में बेटी मरियम के फर्जी दस्तावेज से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की कुर्सी खतरे में पड़ गई है। शरीफ पर इस्तीफा देने का दबाव बढ़ गया है। विपक्ष उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है। पनामा गेट मामले की जांच करने वाले संयुक्त जांच दल (जेआईटी) ने मरियम पर जाली दस्तावेज सौंपने का आरोप मढ़ा है। साथ ही इसे आपराधिक मामला करार दिया है। मरयम को राजनीति में शरीफ के उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जाता है।

छह सदस्यीय जेआईटी ने शरीफ परिवार की विदेश में संपत्ति और मनी लांड्रिंग से जुड़े मामलों की जांच कर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट दाखिल की। जेआईटी ने 43 वर्षीय मरियम से चार जुलाई को पूछताछ की थी। उनके पति कैप्टन मुहम्मद सफदर से भी पूछताछ हुई थी। इस मामले में प्रधानमंत्री शरीफ, उनके दोनों बेटों हुसैन व हसन और उनके भाई व पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री शाहबाज शरीफ को भी पूछताछ का सामना करना पड़ा था।

डॉन न्यूज के अनुसार, जेआईटी ने कहा कि मरियम, उनके भाइयों हुसैन व हसन के साथ ही उनके पति सफदर ने सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करने के लिए फर्जी दस्तावेज सौंपे। जांच में नवाज शरीफ परिवार के पास अकूत संपत्ति होने का भी पता चला। इस बीच मरियम ने ट्वीट कर जेआईटी के आरोपों से इन्कार किया है।

वहीं विपक्ष के नेता इमरान खान ने नवाज शरीफ से तत्काल इस्तीफे की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जेआइटी का गठन हुआ था। पनामा पेपर लीक में यह बात सामने आयी थी कि नवाज शरीफ की विदेश में काफी संपत्ति है। प्रधानमंत्री के रूप में शरीफ का कार्यकाल जून 2018 तक है। अगर वह इस्तीफा देते हैं तो उनकी पार्टी पीएमएल-एन की ओर पीएम पद के लिए किसी दूसरे का नाम आगे बढ़ाया जा सकता है।


83 करोड़ के लिए उपहार

जेआइटी की रिपोर्ट के अनुसार, मरियम ने 2009 से 2016 के दौरान 7.35 करोड़ से लेकर 83.73 करोड़ रुपये के उपहार प्राप्त किए। बीती सदी के अंतिम दशकों में उनकी संपत्ति में भारी वृद्धि हुई। उनकी आय का कोई स्रोत भी घोषित नहीं किया गया।

माइक्रोसॉफ्ट वर्ड के फॉन्ट ने खोली मरियम की पोल

जेआईटी को सौंपे जाली दस्तावेज में मरियम ने माइक्रोसॉफ्ट वर्ड के जिस फॉन्ट का इस्तेमाल किया था, उससे उनकी पोल खुल गई। एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार, जेआईटी ने अपनी रिपोर्ट के पेज संख्या 55 पर बताया कि मरियम के दस्तावेजों में "कैलिबरी" फॉन्ट का इस्तेमाल किया गया। यह फॉन्ट 31 जनवरी, 2007 के पहले तक आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं था जबकि दस्तावेज 2006 के थे। इसके उजागर होने के बाद वह ट्विटर पर लोगों के निशाने पर आ गईं। कई लोगों ने इसे फॉन्टगेट करार दिया। अहमर नकवी ने ट्वीट किया, "इन लोगों में इस मुल्क को चलाने का "कैलिबरी" ही नहीं है।"

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