क्या आपको भी नहीं आ रहे हैं सपने, तो पढ़ें यह काम की खबरUpdated: Mon, 02 Oct 2017 11:45 AM (IST)

औसतन कोई आदमी एक रात में 4-6 सपने देखता है, लेकिन इसमें से 90 फीसद जागने के 10 मिनट के अंदर ही भूल जाता है।

वॉशिंगटन। एक अध्ययन के मुताबिक, लोग चुपचाप एक महामारी की चपेट में आ रहे हैं। उन्हें नींद में सपने नहीं आते हैं, जो कई बीमारियों का कारण हो सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाली ऐसी बीमारी है, जिस पर लोग ध्यान नहीं दे पाते हैं। अध्ययन का दावा है कि सपने नहीं आने से लोग अवसाद की चपेट में आ सकते हैं।

शोधकर्ताओं ने विभिन्न कारकों के बारे में विस्तार से बताया है, जिससे रैपिड आई मूवमेंट (REM) होता है और जो नींद औस सपने नहीं आने का कारण है। आमतौर पर सामान्य नींद एक पैटर्न होता है, जिसमें शरीर की प्राथमिकता गहरी और बिना-आरईएम की नींद होती है। केवल देर रात में और अल सुबह ही लोग सपने देखने का अनुभव करते हैं, जब REM स्लीप होता है।

हम जैसे नींद की कमी का अनुभव कर रहे हैं, वैसे ही सपने आने में भी कमी होती जा रही है। अमेरिका में एरिजोना विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर रूबिन नेमन ने कहा कि हमारी कई स्वास्थ्य चिंताओं का कारण वास्तव में नींद की कमी है, जो REM स्लीप से वंचित होने के कारण होती है।

वह REM या सपनों के नहीं आने के एक अपरिचित सार्वजनिक स्वास्थ्य के खतरे के रूप में देखते हैं। यह बीमारी चुपचाप लोगों को अवसाद की ओर ले जाती है और चेतना की कमी का कारण बनती है। न्यूयार्क एकेडमी ऑफ साइंसेज के एनल्स में प्रकाशित समीक्षा में दवाओं, नींद की बीमारियों, व्यवहार और जीवनशैली से जुड़े कारणों के डेटा का विश्लेषण किया, जो REM या सपनों की कमी के साथ जुड़े थे।

इसलिए आते हैं सपने

सपने क्यों आते हैं, इसका कोई ठोस प्रामाणिक उत्तर आज तक खोजा नहीं मिल सका है। मगर, माना जाता है कि सपने आने का एक कारण 'नींद' भी हो सकता है। विज्ञान मानता है कि नींद का हमारे मस्तिष्क में होने वाले उन परिवर्तनों से संबंध होता है, जो सीखने और याददाश्त बढ़ाने के साथ-साथ मांस पेशियों को भी आराम पहुंचाने में सहायक होते हैं।

इस नींद की ही अवस्था में मस्तिष्क की कोशिकाएं न्यूरॉन पुनः सक्रिय हो जाती हैं। वैज्ञानिकों ने नींद को दो भागों में बांटा है पहला भाग REM यानी रैपिड आई मूवमेंट है, जिसमें अधिकतर सपने आते हैं। इसमें शरीर शिथिल परंतु आंखें तेजी से घूमती रहती हैं और मस्तिष्क जाग्रत अवस्था से भी ज्यादा गतिशील होता है।

हम कितने सपने देखते हैं

औसतन कोई आदमी एक रात में 4-6 सपने देखता है, लेकिन इसमें से 90 फीसद जागने के 10 मिनट के अंदर ही भूल जाता है। एक व्यक्ति अपने पूरी जिंदगी के करीब छह साल सपने देखने में ही गुजार देता है।

दिमागी हलचल होती है तेज

दिमाग सपने देखने की कुछ अवस्था के दौरान जागने से भी ज्यादा सक्रिय रहता है। इस अवस्था को REM यानी कि आंखों की तीव्र गतिशीलता कहा जाता है, जो कि कोई गंभीर सपना देखने के दौरान होता है। ऐसे सपनों के दौरान पूरा शरीर शिथिल रहता है, जो कि शरीर को सपने के अनुसार काम करने से रोकता है।

सपनों से सीखते हैं आप

रिसर्च से यह बात साबित हुई है कि सपने आपको सीखने और समस्याओं का समाधान करने में मदद करते हैं। सपने दिमाग के एक तरीके की तरह हैं, जो नई जानकारियों को समझाते हैं। अक्सर लोग सपनों के दोबारा देखने को महसूस करते हैं, जिनका संबंध हमारे आसपास की और हमसे जुड़ी उन चीजों से होता है, जिनके बारे में हमे समझने की जरूरत होती है।

जरूर पढ़ें

FOLLOW US

Copyright © Naidunia.