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आसियान शिखर सम्मेलन : चार देशों के गठबंधन की कूटनीति और पुख्ता हुईUpdated: Tue, 14 Nov 2017 10:24 PM (IST)

मनीला में आसियान और ईस्ट एशिया सम्मेलन के दूसरे दिन भी अमेरिका, भारत, जापान और आस्ट्रेलिया के बीच गठित नए गठबंधन की कूटनीति हावी रही।

मनीला, नई दिल्ली। फिलीपींस की राजधानी मनीला में आसियान और ईस्ट एशिया सम्मेलन के दूसरे दिन भी अमेरिका, भारत, जापान और आस्ट्रेलिया के बीच गठित नए गठबंधन की कूटनीति हावी रही।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को जापान के प्रधानमंत्री शिंजो एबी और आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल के साथ अलग- अलग मुलाकात कर गठबंधन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर बात की।

प्रधानमंत्री मोदी की वियतनाम और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्रियों और ब्रुनेई के सुल्तान से भी अलग-अलग मुलाकात हुई जो हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका को देखते हुए बेहद महत्वपूर्ण है।

चार देशों के बीच बने इस गठबंधन को लेकर इन देशों के विदेश मंत्रालयों के अधिकारियों की पहली बैठक पिछले रविवार को मनीला में ही हुई है। लेकिन, उसके दो दिनों के भीतर ही इन चारों देशों के सरकारों के प्रमुखों की अलग-अलग आपस में मुलाकात हो चुकी है।

सोमवार को अगर प्रधानमंत्री मोदी की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मुलाकात हुई तो उसी दिन ट्रंप की एबी और टर्नबुल से भी अलग-अलग बैठक हुई। मंगलवार को मोदी की एबी और टर्नबुल के साथ द्विपक्षीय मुलाकात हुई। कूटनीतिक जानकारों के मुताबिक, चारों देशों के प्रमुखों ने जानबूझकर साझा बैठक नहीं की।

साझा बैठक होने से चीन को थोड़ा ज्यादा कड़वा संदेश चला जाता। लेकिन, द्विपक्षीय स्तर पर होने वाली इन बैठकों में भी जिस तरह से हिंद और प्रशांत महासागर क्षेत्र में सुरक्षा के मुद्दे को आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया गया है, वह संदेश देने के लिए काफी है।

माना जा रहा है कि जल्द ही चारों देश अपने विदेश, रक्षा व वित्त मंत्रियों की अलग-अलग बैठक की घोषणा करेंगे। उसके बाद ही राष्ट्र प्रमुखों की संयुक्त बैठक प्रस्तावित की जाएगी।

वैसे यह बात अब पक्की लग रही है कि भारत-अमेरिका-जापान के बीच होने वाले नौसैनिक अभ्यास में आस्ट्रेलिया को जल्द ही शामिल कर लिया जाएगा। संभवतः अगले वर्ष जो सैन्य अभ्यास होगा उसमें आस्ट्रेलिया शामिल होगा।

तीन देशों का पिछला सैन्य अभ्यास कुछ महीने पहले बंगाल की खाड़ी में हुआ था। जापान इस गठबंधन को लेकर सबसे ज्यादा उत्साहित है। वह इसे सिर्फ सैन्य या सुरक्षा तक सीमित नहीं रखना चाहता बल्कि वह इसका आर्थिक व निवेश के क्षेत्र में भी विस्तार करने का इच्छुक है।

विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (पूर्व) प्रीति सरन के मुताबिक, मोदी और एबी के बीच द्विपक्षीय हितों के साथ ही वैश्विक हितों को लेकर काफी अच्छी चर्चा हुई है।

इसमें भारत और जापान की मदद से एशिया-अफ्रीका कॉरीडोर बनाने को लेकर भी विमर्श हुआ। इस बारे में पिछले दिनों जब एबी भारत आए थे तब यह सहमति बनी थी कि दोनों देश एशिया से लेकर अफ्रीका तक में रेल व सड़क नेटवर्क तैयार करेंगे और इसे कई औद्योगिकी पार्कों से जोड़ा जाएगा।

माना जाता है कि यह चीन की प्रस्तावित वन बेल्ट वन रोड (ओबोर) का मुकाबला करेगा। अमेरिका ने भी भारत और जापान की इस रणनीति का स्वागत किया है। आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री के साथ मोदी की बातचीत में हिंद-प्रशांत महासागर सुरक्षा मुद्दों के साथ आतंकवाद का मुद्दा सबसे अहम रहा।

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