क्रिकेट का बादशाह भारत आज लिखेगा फुटबॉल गाथाUpdated: Thu, 05 Oct 2017 09:44 PM (IST)

शुक्रवार को पहली बार भारतीय टीम मेजबान होने के नाते इस टूर्नामेंट में खेलने उतरेगी।

अभिषेक त्रिपाठी, नई दिल्ली. क्रिकेट का बादशाह भारत अब फुटबॉल गाथा लिखने को तैयार है। दुनिया में सबसे ज्यादा खेले जाने वाले खेल फुटबॉल की वैश्विक संस्था फीफा किसी भी कीमत पर भारत और खासकर सवा अरब से ज्यादा भारतीयों को फुटबॉल से जोड़ना चाहती है और यही कारण था कि उसने चार साल पहले टॉप-100 रैंकिंग से भी कोसों दूर रहने वाले देश को पहली बार अंडर-17 विश्व कप की मेजबानी सौंपी।

अब वह सोता हुआ शेर जगने को तैयार है। फीफा ही नहीं पूरी दुनिया को उम्मीद है कि इस टूर्नामेंट के जरिये भारत में फुटबॉल को लेकर अलख जगेगी और जनसंख्या के तौर पर दूसरे व भौगोलिक रूप से सातवें सबसे बड़े देश में इस खेल का प्रसार होगा।

1947 में आजाद होने के बाद से भारत ने कभी भी किसी फीफा विश्व कप में भाग नहीं लिया है। शुक्रवार को पहली बार भारतीय टीम मेजबान होने के नाते इस टूर्नामेंट में खेलने उतरेगी। अगर टीम दूसरे दौर में भी पहुंचने में सफल होती है तो यह बड़ी बात होगी।

प्रधानमंत्री भी आएंगे

मेजबान भारत और अमेरिका के बीच होने वाले मैच से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फीफा महासचिव फातमा समौरा और फीफा टूर्नामेंटों के प्रमुख जेमी यारजा मौजूद रहेंगे। इस दौरान भारतीय फुटबॉल जगत के दिग्गज आइएम विजयन, बाईचुंग भूटिया और सीनियर फुटबॉल टीम के कप्तान सुनील छेत्री भी जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में मौजूद रहेंगे।

स्टेडियम फुल होने की उम्मीद : भारतीय टीम अपना पहला मैच अमेरिका के खिलाफ राजधानी के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में खेलेगी। इस स्टेडियम में 60,000 दर्शक बैठ सकते हैं। आयोजकों को पहले दिन स्टेडियम फुल होने की उम्मीद है।

वैश्विक तौर पर फुटबॉल में भारत का प्रदर्शन : वैसे तो यह अंडर-17 विश्व कप है लेकिन अगर ओवऑल फुटबॉल की बात करें तो 1950 से 1960 के बीच उसका स्वर्णिम काल था। उस समय भारतीय टीम एशिया की शीर्ष टीम थी। भारत ने 1951 और 1962 एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता व 1956 ओलंपिक में टीम चौथे नंबर पर रही। दूसरी टीमों के हटने के कारण भारत ने 1950 विश्व कप के लिए क्वालीफाई भी किया था लेकिन बाद में वह भी इससे हट गया।

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