भारतीय क्रिकेटरों को करवाना पड़ रहा डीएनए टेस्ट, जानें पूरा मामलाUpdated: Mon, 13 Nov 2017 07:54 AM (IST)

प्रत्येक खिलाड़ी के परीक्षण में बीसीसीआई को 25 से 30 हजार रुपए के बीच खर्च करना पड़ रहा है जो कि काफी कम धनराशि है।

नई दिल्ली। भारतीय कप्तान विराट कोहली के फिटनेस को लेकर बेहद सख्त रवैये को देखते हुए भारतीय क्रिकेटरों को अब डीएनए टेस्ट से गुजरना पड़ रहा है। इससे प्रत्येक खिलाड़ी की आनुवांशिक फिटनेस स्थिति के बारे में पता चल रहा है।

इस परीक्षण से खिलाड़ी को अपनी रफ्तार को बढ़ाने, मोटापा कम करने, दमखम बढ़ाने और मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद मिलती है।

पता चला है कि बीसीसीआई ने टीम ट्रेनर शंकर बासु की सिफारिश पर इस परीक्षण को शुरू किया है ताकि राष्ट्रीय टीम के लिए अधिक व्यापक फिटनेस कार्यक्रम तैयार किया जा सके।

फिटनेस के नए मापदंड डीएनए टेस्ट या आनुवांशिक फिटनेस परीक्षण से 40 साल से अधिक उम्र के व्यक्ति की भी फिटनेस, स्वास्थ्य और पोषण से संबंधित तथ्यों के बारे में पता किया जा सकेगा।

इसके बाद संपूर्ण विश्लेषण के लिए प्रत्येक क्रिकेटर के डीएनए आंकड़ों को एक व्यक्ति विशेष का वजन और खानपान जैसे परिवेशी आंकड़ों के साथ मिलाया जाएगा।

डीएनए परीक्षण सबसे पहले अमेरिका में एनबीए (बास्केटबॉल) और एनएफएल में शुरू किए गए। प्रत्येक खिलाड़ी के परीक्षण में बीसीसीआई को 25 से 30 हजार रुपए के बीच खर्च करना पड़ रहा है जो कि काफी कम धनराशि है।

पहले स्किनफोल्ड और डेक्सा

इससे पहले भारतीय टीम का शरीर में वसा के प्रतिशत का पता करने के लिए स्किनफोल्ड टेस्ट और बाद में डेक्सा टेस्ट होता था। अधिकारी ने कहा- स्किनफोल्ड टेस्ट मुख्य रूप से लंबे समय के लिए उपयोग किया गया था, लेकिन इसमें पाया गया कि शरीर में वसा की मात्रा को लेकर परिणाम पूरी तरह से सही नहीं हैं।

इसके बाद शरीर में वसा का प्रतिशत पता करने के लिए डेक्सा टेस्ट अपनाया गया। अब डीएनए परीक्षण किया जा रहा है ताकि एक निश्चित वसा प्रतिशत को बनाए रखने के लिए शरीर की जरूरतों का पता लगाया जा सके।

अभी सीनियर राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ी के लिए शरीर में वसा की दर 23 प्रतिशत है जो कि पाकिस्तान और न्यूजीलैंड सहित अधिकतर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टीमों के लिए मानक है। कुछ खिलाड़ी बचपन से ही काफी मात्रा में दूध पीते रहे हैं, क्योंकि आम धारणा है कि दूध से आपको मजबूती मिलती है।

इसके बाद उन्हें पता चलता है कि कड़े अभ्यास के बाद भी उनका शरीर वर्तमान में खेल की जरूरतों के हिसाब से खरा नहीं उतर पा रहा है।

भुवी में सबसे ज्यादा सुधार : एक खिलाड़ी जिसकी मजबूती और दमखम में काफी सुधार हुआ वह तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार है जो वन-डे और टी-20 में लगातार खेल रहा है। चैंपियंस ट्रॉफी शुरूहोने के बाद भुवनेश्वर ने 19 वन-डे और 7 टी-20 अंतरराट्रीय मैच खेले और यह उनकी आनुवंशिक फिटनेस रिपोर्ट तैयार करने के बाद नए फिटनेस रूटीन के बाद ही संभव हो पाया।

डीएनए टेस्ट शरीर की क्षमताओं का पता करने और यह जानने के लिए किया जाता है कि किसी खास खिलाड़ी के लिए किस तरह का खाना और कसरत अधिक प्रभावी होगा।

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