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क्‍या बीसीसीआई को डालमिया जैसा वैश्विक प्रशासक दोबारा मिलेगा?Updated: Sun, 20 Sep 2015 10:04 PM (IST)

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्‍यक्ष जगमोहन डालमिया का स्‍थानीय अस्‍पताल में निधन हो गया।

खेल डेस्‍क। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) को रविवार को गहरा झटका लगा। विश्‍व स्‍तर के प्रशासक और बीसीसीआई अध्‍यक्ष जगमोहन डालमिया का 75 वर्ष की उम्र में स्‍थानीय अस्‍पताल में निधन हो गया।

जगमोहन डालमिया को विश्‍व स्‍तर पर बेहतर प्रशासक माना जाता था। अब सवाल उठता है कि क्‍या बीसीसीआई को डालमिया जैसा विश्‍व स्‍तर का सशक्‍त प्रशासक दोबारा मिल पाएगा?

आईए जानते हैं बीसीसीआई अध्‍यक्ष की जिंदगी के बारे में तथा उनके अतुल्‍नीय योगदान, जिसकी भरपाई करना बीसीसीआई और कैब के लिए आसान नहीं होगा-

ऐसी रहा जीवन

डालमिया का जन्‍म 30 मई 1940 को कलकत्‍ता (अब कोलकाता) में हुआ था। डालमिया का जन्‍म कोलकाता के मारवाड़ी परिवार में हुआ। उन्‍होंने कलकत्‍ता के स्‍कॉटिश चर्च कॉलेज में अपनी पढ़ाई पूरी की। क्रिकेट में डालमिया ने विकेटकीपर के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्‍होंने एक बार दोहरा शतक भी जमाया था।

इसके बाद डालमिया अपने पिता एमएल डालमिया के साथ जुड़ गए और उनकी कंपनी भारत की शीर्ष कंस्‍ट्रक्‍शन फर्म बन गई। 1963 में उनकी फर्म कलकत्‍ता के एमपी बिरला प्‍लेनेटेरियम निर्मित हुई।

वह भारतीय क्रिकेट में प्रशासक थे। मीडिया में उन्‍हें कई प्रकार के नामों से पुकारा जाता था जैसे भारतीय क्रिकेट के माछियावेली, रीयलपॉलिटिक के मास्‍टर, वापसी करने के महारथी आदि।

डालमिया भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (कैब) के अध्‍यक्ष पद रहे। वह क्रिकेट की सबसे बड़ी संस्‍था अंतरराष्‍ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के भी मुखिया रहे।

बीसीसीआई से नाता

डालमिया 1979 में बीसीसीआई से जुड़े। 1983 में वो कोषाध्‍यक्ष बने। इसी साल भारत ने विश्‍व कप जीता। इसके बाद उन्‍होंने इंदरजीत सिंह बिंद्रा के साथ मिलकर 1987 और 1996 का विश्‍व कप दक्षिण एशिया में आयोजित कराने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई।

डालमिया को बीसीसीआई के अध्‍यक्ष पद पर कई बार चुना गया। 1996 में उन्‍होंने 23 वोट हासिल करते हुए ऑस्‍ट्रेलिया के माल्‍कोम ग्रे (13 वोट) को आईसीसी के चेयनमैन के पद के लिए मात दी। मगर आईसीसी के संविधान के मुताबिक डालमिया दो-तिहाई से ज्‍यादा वोट अपने पक्ष में नहीं कर सके। हालांकि 1997 में उन्‍हें निर्विवाद आईसीसी का अध्‍यक्ष चुना गया और उन्‍होंने तीन साल अपनी जगह बरकरार रखी।

खिलाडि़यों के लिए हमेशा खड़े रहे

डालमिया ने हमेशा अपने देश के खिलाडि़यों का समर्थन किया। आईसीसी पद पर रहते हुए डेनिस मामले ने काफी तूल पकड़ी थी। आईसीसी के रैफरी और पूर्व इंग्लिश कप्‍तान माइक डेनिस ने सचिन तेंडुलकर को तकनीकि नियमों का उल्‍लंघन करते हुए पाया था। भारतीय मीडिया ने इसे बॉल टेंपरिंग का आरोप बताया था। इसमें सचिन पर जुर्माना लगाया गया और निलंबन का संदेश भी दिया गया।

इसके अलावा वीरेंद्र सहवाग पर टप्‍पा खा चुकी गेंद को कैच बताने के लिए एक मैच का प्रतिबंध लगाया गया था। भारत की संसद में इस पर काफी बहस हुई। डालमिया ने आईसीसी से अपील की जो खारिच कर दी गई। डालमिया ने डेनिस को मैच रैफरी पद से हटाने के लिए कहा, नहीं तो टेस्‍ट मैच कैंसल करने की बात कही। आखिरकार, डेनिस को आखिरी मैच में रैफरी करने नहीं दी गई क्‍योंकि बीसीसीआई और यूसीबीएसए ने उन पर दबाव बनाया।

लगे आरोप

2005 बीसीसीआई बोर्ड चुनाव में उनके सदस्‍य रणबीर सिंह महेंद्र को शरद पवार ने मात देकर अध्‍यक्ष पद हासिल किया। अगले साल फंड में घपलेबाजी के चलते और सही दस्‍तावेज नहीं पेश करने के कारण डालमिया को बीसीसीआई से हटा दिया गया।

हालांकि 2007 में जब डालमिया ने बाम्‍बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी तो पाया कि बीसीसीआई उन्‍हें दोषी ठहराने के लिए उपयुक्‍त दस्‍तावेज पेश नहीं कर सकी। 2007 में ही कलकत्‍ता हाई कोर्ट ने उन पर से सभी जुर्माने हटाए और क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल के अध्‍यक्ष पद का चुनाव लड़ने की इजाजत दी जो वो जीत गए।

जून 2013 में डालमिया को बीसीसीआई का अंतरिम अध्‍यक्ष नियुक्‍त किया गया। ऐसा इसलिए किया गया क्‍योंकि श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्‍पन को आईपीएल स्‍पॉट फिक्सिंग का दोषी पाया गया। श्रीनिवासन ने अक्‍टूबर 2013 में अपना अध्‍यक्ष पद दोबारा संभाला। इसके बाद 2 मार्च 2015 को डालमिया पुन: बीसीसीआई अध्‍यक्ष पर लौटे। उन्‍होंने 10 साल के बाद यह गद्दी संभाली। चुनाव में डालमिया ने श्रीनिवासन को हराया।

पुरस्‍कार

2005 में डालमिया को वैश्विक खेल में प्रशासनिक उत्‍कृष्‍टता के लिए इंटरनेशनल जर्नल ऑफ द हिस्‍ट्री ऑफ स्‍पोर्ट्स अचीवमेंट अवॉर्ड दिया गया।

1996 में बीबीसी ने डालमिया को शीर्ष छह स्‍पोर्ट्स अधिकारियों में से एक घोषित किया। जब ऑस्‍ट्रेलिया और वेस्‍टइंडीज ने आतंक के डर के चलते 1996 विश्‍व कप में श्रीलंका में खेलने से मना किया तो डालमिया ने भारत और पाकिस्‍तान को वहां दोस्‍ताना मैच खेलने के लिए प्रेरित किया।

1991 में जब दक्षिण अफ्रीका का बॉयकॉट खत्‍म हुआ तो डालमिया ने जल्‍द ही नस्‍लभेद खत्‍म करने के इरादे से उनका भारत दौरा आयोजित किया। ऑस्‍ट्रेलिया के महान क्रिकेटर और कमेंटेटर इयान चैपल ने डालमिया के बारे में कहा था- उनके पास खेल के विकास के लिए दृष्टि है। मैंने ऐसे आइडिया किसी अन्‍य अधिकारी से नहीं सुने।

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