करें शनि की आराधना, खुलेंगे तरक्की के रास्तेUpdated: Thu, 25 May 2017 02:29 PM (IST)

शनि की साढ़े साती या ढैय्या से गुजर रहे जातकों को विशेष तौर पर शनि अमावस्या के दिन पूजा-अर्चना करनी चाहिए।

शशांक शेखर बाजपेई। शनि जयंती या शनि अमावस्या 25 मई 2017 को गुरुवार के दिन मनाई जाएगी। पिता सूर्य का रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश और पुत्र शनि उसी दिन जन्म होना विशेष संयोग बना रहा है।

शनि की साढ़े साती या ढैय्या से गुजर रहे जातकों को विशेष तौर पर शनि अमावस्या के दिन पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इसी तिथि में नौतपा भी शुरू होंगे और साथ ही इसी दिन अखंड सौभाग्य के लिए महिलाएं वट सावित्री व्रत करेंगी।

उज्जैन के पंडित अमर डब्बावाला ने बताया कि शनि देव का जन्म ज्येष्ठ अमावस्या के दिन हुआ था। शनि देव को कृष्ण वर्ण का बताया जाता है, इसलिए इन्हें काला रंग अधिक प्रिय है। यह न्याय के देवता हैं, योगी, तपस्या में लीन और हमेशा दूसरों की सहायता करने वाले होते हैं। शनि ही जीवों को सभी कर्मों का फल प्रदान करते हैं।

शनि देव को प्रसन्न करने के लिए उपाय

पंडित अमर ने बताया कि शनि का तेल से अभिषेक करना चाहिए, शनि महामृत्युंजय का जाप करना चाहिए, महाकाल श्री मृत्युंजय स्त्रोत, शनि स्त्रोत का पाठ करना। शनि के वैदिक जप का पाठ भी कर सकते हैं।

विवाह के लिए यह करें

जिन लोगों के विवाह में परेशनी आ रही है, उन्हें पीपल की पूजा करने, शनि का अभिषेक करने से राहत मिलेगी। हो सके तो छोटा सा हवन कर लें और शनि से जुड़ी वस्तुओं का दान कर लें। इससे शादी में आ रही बाधाएं दूर होंगी और मांगलिक कार्यों की रुप-रेखा बन सकेगी।

नौकरी-व्यापार के लिए यह करें

नौकरीपेशा लोग तरक्की के लिए शनि के जप, शनि के दान और शनि की पूजा से अनुकूलता को प्राप्त कर सकते हैं। शनि ग्रह 23 अगस्त को मार्गी हो रहा है, जो इसके बाद तरक्की के रास्ते खोलेगा।

बच्चों की पढ़ाई के लिए यह करें

पंडित अमर डब्बावाला ने बताया कि जिन बच्चों को पढ़ाई में सफलता नहीं मिल रही है या जिनका पढ़ने में मन नहीं लग रहा है, वे काले घोड़े की नाल की अंगूठी मध्यमा उंगली में पहनने और नील सरस्वती स्त्रोत का पाठ करें। इससे एकाग्रता बनेगी।

विशिष्ट फल मिलता है

ज्योतिष में नौ मुख्य ग्रहों में से शनि को भी स्थान मिला है और वह अन्य ग्रहों की तुलना मे धीमे चलते हैं इसलिए इन्हें शनैश्चर भी कहा जाता है। शनि ग्रह वायु तत्व और पश्चिम दिशा के स्वामी बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार शनि जयंती पर उनकी पूजा-आराधना और अनुष्ठान करने से शनिदेव विशिष्ट फल प्रदान करते हैं। शनि देव को प्रसन्न करने के लिए अनेक मंत्रों व स्तोत्रों का गुणगान किया जाता है।

इन चीजों का करें दान

शनि की कृपा एवं शांति प्राप्ति के लिए काले तिल, उड़द, कालीमिर्च, मूंगफली का तेल, आचार, लौंग, तेजपत्ता तथा काले नमक का उपयोग करना चाहिए। शनि देव को प्रसन्न करने के लिए हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए। शनि की शांति के लिए काले कपडे़, जामुन, काली उड़द, काले जूते, तिल, लोहा, तेल आदि वस्तुओं का दान कर सकते हैं।

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