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यह है वो कारण, इसीलिए करते हैं ऋषि पंचमी का व्रतUpdated: Tue, 06 Sep 2016 09:43 AM (IST)

अगले जन्म में उसे अटल सौभाग्य सहित अक्षय सुखों का भोग मिला।

ऋषि पंचमी पर सप्त ऋषियों की पूजा की जाती है। 'शतपथ ब्राह्मण' के अनुसार गौतम, भारद्वाज, विश्वामित्र, जमदग्नि, वसिष्ठ, कश्यप और अत्रि हैं।

जबकि 'महाभारत' के अनुसार मरीचि, अत्रि, अंगिरा, पुलह, क्रतु, पुलस्त्य और वसिष्ठ सप्तर्षि माने गए हैं। ऋषि पंचमी के दिन इन्हीं ऋषियों की पूजा की जाती है।

ऋषि पंचमी की पौराणिक कथा

बात बहुत पुरानी है। एक गांव था। वहां एक उत्तंक नाम का ब्रह्माण अपने परिवार के साथ रहता था। उसकी एक कन्या थी। एक दिन ब्राह्मण कन्या सो रही थी कि उसका शरीर कीड़ों से भर गया।

तब उस कन्या नने सारी बात मां को बताई। मां ने पति से सब कहते हुए पूछा, 'मेरी कन्या की यह गति होने का क्या कारण है?'

उत्तंक ने समाधि द्वारा इस घटना का पता लगाकर बताया, 'पूर्व जन्म में भी यह कन्या ब्राह्मणी थी। इसने रजस्वला होते ही बर्तन छू दिए थे। इस जन्म में भी इसने लोगों की देखा-देखी ऋषि पंचमी का व्रत नहीं किया। इसलिए इसके शरीर में कीड़े पड़े हैं।'

हिंदू धर्म ग्रंथों में वर्णित है कि रजस्वला स्त्री पहले दिन चाण्डालिनी, दूसरे दिन ब्रह्मघातिनी तथा तीसरे दिन धोबिन के समान अपवित्र होती है। वह चौथे दिन स्नान करके शुद्ध होती है।

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उत्तंग ने आगे कहा, 'यदि यह शुद्ध मन से अब भी ऋषि पंचमी का व्रत करे तो इसके सारे दुख दूर हो जाएंगे और अगले जन्म में अटल सौभाग्य प्राप्त करेगी।' पिता की आज्ञा से पुत्री ने विधिपूर्वक ऋषि पंचमी का व्रत एवं पूजन किया।

व्रत के प्रभाव से वह सारे दुखों से मुक्त हो गई। अगले जन्म में उसे अटल सौभाग्य सहित अक्षय सुखों का भोग मिला। यही कारण है कि महिलाएं ऋषि पंचमी का व्रत करती हैं।

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