चंद्रदेव का प्रिय रत्न धारण करें पर रखें ये सावधानीUpdated: Wed, 16 Jul 2014 03:03 PM (IST)

ग्रहों की पीड़ा को कम करने में ग्रहों से संबंधित रत्न धारण करने का विधान है। चंद्र का रत्न मोती है।

ग्रहों की पीड़ा को कम करने में ग्रहों से संबंधित रत्न धारण करने का विधान है। चंद्र का रत्न मोती है। चंद्र की पीड़ा से मुक्ति पाने के लिए मोती को धारण किया जाता है। किंतु मोती धारण करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।

  • यह लोग कर सकते हैं धारण
  • अमावस्या पर जन्म होने पर मोती धारण करना चाहिए।
  • राहू के साथ ग्रहण योग निर्मित होने पर मोती अवश्य ग्रहण धारण करना चाहिए।
  • चंद्र का अपनी कुंडली में छठे भाव अथवा आठवें भाव में होने पर मोती धारण करें।
  • कारक अथवा लग्नेश चंद्र नीच का हो तो मोती धारण करना चाहिए।

रत्न धारण करने की विधि

कहते हैं कि चंद्रदेव का प्रिय रत्न मोती है। उपरत्नों में चंद्रमणि व सफेद हकीक है। यदि आप रत्न धारण के इच्छुक हैं तो 8 से 15 रत्ती के मोती को चांदी की अंगूठी में जड़वाएं। फिर किसी भई शुक्ल पक्ष के पहले सोमवार को चंद्रोदय होने के बाद दूध में गंगाजल, शहद व चीनी मिलाकर उसमें अंगूठी डाल दें।

फिर पांच अगरबत्ती चंद्रदेव के नाम की जलाएं। चंद्रदेव से प्रार्थना करें कि हे चंद्रदेव, मैं आपका आशीर्वाद पाने के लिए आपका प्रतिनिधि रत्न धारण कर रहा हूं, मुझे आशीर्वाद दें। इसके बाद अंगूठी निकाल लें, और ऊँ सोमाय नमः या किसी भी चंद्र मंत्र का जाप करें। अंगूठी के चारों तरफ अगरबत्ती घूमाएं और इसे अनामिका अंगुली में धारण करें।

मोती की प्रभाव अवधि

मोती धारण करने की तिथि से 4 दिन में प्रभाव देना आरंभ करता है और लगभग 2 वर्ष एक माह व 27 दिन पूर्ण प्रभाव देता है, फिर निष्क्रिय हो जाता है। इसलिए यदि आपकी आर्थिक स्थिति अच्छी है तो इस समय के बाद आप मोती बदल डालें।

यदि नहीं बदल सकते हैं तो पुनः उसी अंगूठी को गुनगुने पानी में एक चुटकी नमक डालकर अंगूठी की ऋणात्मक शक्ति समाप्त करें। फिर शुद्ध होने पर उसे धारण करें।

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