नौकरी से हैं परेशान, शनि देव करेंगे समाधानUpdated: Wed, 24 May 2017 03:49 PM (IST)

तेल में बनी खाद्य सामग्री कुत्ते, गाय या किसी जरूरतमंद को दान करें।

काले रंग की वस्तुएं जैसे लोहा, ऊन, तेल, गैस, कोयला, कार्बन से बनी वस्तुएं, चमड़ा, मशीनों के पार्ट्स, पेट्रोल, पत्थर, तिल और रंग का व्यापार शनि से जुड़े जातकों पर असर डालता है।

चपरासी की नौकरी, ड्राइवर, समाज कल्याण के कार्यों से जुड़ा नौकरी जैसे नगर पालिक निगम से जुड़ी नौकरियां, जज, वकील, राजदूत आदि पद शनि की नौकरी वाले वाले कार्यों में शामिल किए गए हैं। इन सभी को शनिदेव की आराधना करना चाहिए।

सूर्य और शनि में कटुता

श्रुति है सूर्यदेव का विवाह संज्ञा से हुआ था और उनसे तीन संतानों मनु, यम और यमुना की प्राप्ति हुई। कुछ समय संज्ञा ने सूर्यदेव के साथ निर्वाह किया किंतु जब सूर्य के तेज को अधिक समय तक सहन करना उसके वश में नहीं रहा तो उसने अपनी छाया को पति सूर्य की सेवा में छोड़ दिया।

छाया से शनिदेव का जन्म हुआ। शनि के श्याम वर्ण को देखकर सूर्य ने अपनी पत्नी पर आरोप लगाया कि शनि उनकी संतान नहीं है। जब शनि को इस बात का पता चला तो वह अपने पिता से क्रुद्ध हो गए।

इसी के चलते शनि और सूर्य में बैर की बात कही जाती है। शनि ने साधना और तपस्या के बल पर भगवान शिव को प्रसन्न कर अपने पिता सूर्यदेव के समान शक्तियां प्राप्त कीं।

ऐसे करें शनि पूजन

अपने घर में ही शनिदेव का पूजन करना हो तो नित्यकर्म से निवृत्त होकर एक लकडी के पाट पर काला कपड़ा बिछाकर उस पर शनिदेव की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। शुद्ध घी और तेल का दीपक जलाएं और धूप करें।

शनिदेव को जल, दुग्ध, घी, पंचामृत, इत्र से स्नान कराकर उनका पूजन करें। इमरती और तेल में बनी वस्तुओं का भोग लगाएं। इसके साथ ही ऋतुफल सहित नारियल उन्हें अर्पित करें।

शनि जयंती पर करें ये उपाय

- प्रात:काल जागने के पश्चात शनिदेव का ध्यान करें।

- सूर्योदय से पूर्व ही शरीर पर तेल मालिश कर स्नान करें।

- शनिदेव के दर्शनों के साथ ही साथ हनुमानजी के दर्शन अवश्य करें।

- पूरे दिन ब्रह्यचर्य का पालन करें।

- इस दिन जहां तक संभव हो यात्रा को टाल दें।

- पौधारोपण का इस दिन विशेष महत्व है तो पौधारोपण करें।

- गरीबों, विकलांगों और असहाय लोगों की हर संभव मदद करें।

- तेल में बनी खाद्य सामग्री कुत्ते, गाय या किसी जरूरतमंद को दान करें।

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