इंद्रदेव के कारण महिलाएं भोगती हैं मासिक धर्म की पीड़ाUpdated: Mon, 17 Jul 2017 10:38 AM (IST)

यह सवाल हर महिला के मन में एक बार जरूर उठता है कि आखिर उन्‍हें ही क्‍यों मासिक धर्म की पीड़ा से गुजरना पड़ता है।

यह सवाल हर महिला के मन में एक बार जरूर उठता है कि आखिर उन्‍हें ही क्‍यों मासिक धर्म की पीड़ा से गुजरना पड़ता है। वैसे तो इसके वैज्ञानिक कारण है लेकिन इसके हिंदू धर्म में इसका धार्मिक कारण भी बताया गया है। इसके पीछे जिस कथा का जिक्र किया जाता है वह इस प्रकार है-

एक समय था जब इंद्र देव से ‘गुरु बृहस्पति’ बहुत नाराज चल रहे थे। इस बात की जानकारी जब असुरों को लगी तो उन्‍होंने देवलोग पर आक्रमण कर दिया, इस वजह से देवराज इंद्र को अपनी गद्दी छोड़कर वहां से भागना पड़ा। आपने आपको बचने के लिए इंद्र भगवान ब्रह्मा जी की शरण में पहुंचे और उनसे इस विपत्ति से निकलने का रास्‍ता पूछा।

ब्रह्मा जी ने इंद्र को बताया की उन्‍हें एक ब्रह्म ज्ञानी की सेवा करनी चाहिए और अगर वो प्रसन्‍न हो गए तो आपको आपकी सत्‍ता वापस मिल सकती है। भगवान इंद्र ने ऐसा ही किया और ब्रह्म ज्ञानी की सेवा करने लगे लेकिन उन्‍हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि ज्ञानी जी की माता असुर है और वह मन में असुरो के प्रति सहानूभूति रखती हैं।

इंद्र देव को जब इस बात की जानकारी मिली कि ज्ञानी जी उनके द्वारा दी गए हवन सामग्री देवताओं की जगह असुरों को अर्पित करते है तो वह बहुत क्रोधित हो गए और उन्होंने गुरु की हत्या कर दी। गुरु की हत्या करने के कारण उन्हें ब्रह्म हत्या का पाप लगा। जिससे बचने के वो भगवान विष्णु की तपस्या की और उन्‍हें प्रसन्‍न कर लिया।

तपस्या से खुश हो कर भगवान विष्णु ने इंद्र को इस पाप से बचने के लिए एक उपाय बताया, उन्‍होंने कहा आप अपने इस पाप को चार लोगों में बांट सकते है लेकिन इसके साथ ही तुम्‍हें उन्‍हें वरदान भी देने होंगे, जिन चार लोगों में तुम इस पाप को बांट सकते है वह है पेड़, भूमि, जल और स्‍त्री। इंद्रदेव ने सभी में इस पाप को बांट दिया और साथ में वरदान भी दे दिया। इस प्रकार स्‍त्री के हिस्‍से में यह पाप मासिक धर्म के रूप में आया और साथ ही उन्‍हें वरदान मिला कि वह पुरुषों की तुलना में सहवास का ज्‍यादा आनंद ले पाएंगी।

अटपटी-चटपटी

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