तो क्या प्राचीन काल में होती थी सरोगेसी!Updated: Sat, 18 Mar 2017 10:03 AM (IST)

लेकिन वैदिक ग्रंथों में सरोगेसी से मिलते-जुलते प्रमाण मिलते हैं।

पिछले दिनों सरोगेसी के कारण मशहूर फिल्म निर्माता-निर्देशक करन जौहर काफी चर्चा में रहे। उन्होंने घोषणा की, कि अब वह दो बच्चों के पिता है, जिनका जन्म सरोगेसी के जरिए हुआ है।

सितंबर 2016 में सरकार ने उस बिल को मंजूरी दे दी थी, जिसमें किराये की कोख (सरोगेसी) वाली मां के अधिकारों की रक्षा के उपाय किए गए हैं। साथ ही सरोगेसी से जन्मे बच्चों के अभिभावकों को कानूनी मान्यता भी देने का प्रावधान है।

लेकिन, कैबिनेट से पास सरोगेसी रेगुलेशन बिल 2016 में यह साफ तौर पर लिखा है कि अविवाहित पुरुष या महिला, सिंगल, लिव-इन रिलेश्नशिप में रहने वाले जोड़े और समलैंगिक जोड़े भी अब सरोगेसी के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं।

वहीं, अब सिर्फ रिश्तेदार में मौजूद महिला ही सरोगेसी के जरिए मां बन सकती है।

पिछले साल मोदी सरकार ने एक बिल पेश किया था, जिसमें अब कोई सिंगल पैरेंट नहीं बन सकता है। अब सरोगेसी के जरिए वही पैरेंट बने सकते हैं जिन्होंने भारतीय कानून के मुताबिक शादी की है। यह बिल अभी संसदीय समिति के पास है।

इस बिल के ड्राफ्ट होने के बाद से ही सिंगल पैरेंट को लेकर आईवीएफ सेंटर सतर्क हो गए हैं। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने तो यहां तक कहा था कि यदि किसी को सिंगल पैरेंट बनना है तो वह बच्चों गोद लें न कि इस सुविधा को शौक के रूप में इस्तेमाल किया जाए।

ये तो बात हुई आधुनिक युग की, लेकिन वैदिक ग्रंथों में सरोगेसी से मिलते-जुलते प्रमाण मिलते हैं। महाभारत में उल्लेखित है कि कुंती के चार पुत्र कर्ण (पांडु से विवाह के पहले) युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन और माद्री के पुत्र नकुल, सहदेव का जन्म संभव है सरोगेसी के जरिए ही हुआ हो?

इसके अलावा धृतराष्ट्र की पत्नी गांधारी के 99 पुत्र और एक पुत्री का जन्म भी सरोगेसी के जरिए ही हुआ होगा! हालांकि यह पूरी तरह से प्रमाणित नहीं हैं। क्योंकि आज से 5 हजार साल पहले सरोगेसी का चलन था या नहीं, लेकिन यह विद्या जरूर रही होगी। ऐसा आधुनिक वैज्ञानिकों का मत है।

जरूर पढ़ें

FOLLOW US

Copyright © Naidunia.