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भगवान ने भी कहा है क्रांति कीजिए, लेकिन कब?Updated: Wed, 19 Apr 2017 10:26 AM (IST)

अच्छे दौर का कैसे उपयोग करना है, बुरे दौर से कैसे निपटना है।

जब-जब पृथ्वी पर अत्याचार बढ़ता है, तब-तब ईश्वर ने किसी ने किसी रूप में जन्म लेकर उस अत्याचार को खत्म किया।

हमारे पौराणिक ग्रंथों में ऐसी कई कहानियों का उल्लेख मिलता है। जिनमें जब पृथ्वी पर अत्याचार बढ़ा तो ईश्वर ने कभी देवी के रूप में तो कभी देवता के रूप में जन्म लिया।

भगवान ने स्वयं कहा है कि जब जब अत्याचार बढेगा। तो क्रांति होगी। यह क्रांति बुराई का अंत करने के लिए होगी। दरअसल, यहां क्रांति का अर्थ मानव कल्याण के लिए है।

जो पूरी तरह से सकारात्मक है। बुराई का अंत करने के लिए की गई क्रांति, कई जन्म-जन्मांतर के दुःखों का अंत कर देती है।

क्रांति से हुआ भारत आजाद

ये तो बात हुई पौराणिक युग की। आधुनिक युग में भी कई क्रांतियां होती हैं। हम बचपन से पढ़ते आए हैं। सन् 1857 की क्रांति यह भी मानवीय हित के लिए की गई, लेकिन कुछ कारणों के चलते असफल रही। लेकिन इन क्रांतियों ने आजादी की आग को एक नई दिशा दी और आखिर भारत आजाद हुआ।

जीवन में होनी चाहिए क्रांति

क्रांति यदि सकारात्मक संदर्भ में की जाए तो बेहतर है। निजी जिंदगी में भी क्रांति होनी चाहिए। यह क्रांति स्वयं से होनी चाहिए। जैसे कि मैं कल क्या था। क्या बन सकता हूं। मुझे क्या नया करना चाहिए। इन सभी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए किस दौर से गुजरना है।

अच्छे दौर का कैसे उपयोग करना है, बुरे दौर से कैसे निपटना है। यह सब कुछ एक तरह से सकारात्मक क्रांति का ही एक रूप है। वैसे यह बेहतर समय है जब क्रांति करनी चाहिए। क्योंकि यह क्रांति भविष्य की बुनियाद रखती है।

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