पूर्व निर्धारित था महाभारत युद्ध, यह थी वजहUpdated: Fri, 06 Jan 2017 05:35 PM (IST)

गांधारी ने दुर्योधन को ये आप-बीती सुनाई तो वहीं कुंती ने अर्जुन को यह बात बताई।

बात द्वापरयुग की है, जब महाभारत का युद्ध शुरु होने वाला था। और युद्ध को टालने के लिए सारी तैयारियां की जा रहीं थीं।

कौरवों की मां गांधारी और पांडवों की मां कुंती नहीं चाहती थीं युद्ध हो इसलिए वह जंगल में मौजूद एक शिव मंदिर में राजोपचार विधि से पूजा कर रही थीं। उनकी पूजा से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए।

उन्होंने कहा, मैं राज्य और मोक्ष का वर देता हूं। यह वर आप दोनों आपस में बांट लीजिए। तब गांधारी ने कहा, मैं अपने पुत्रों के लिए मोक्ष लेकर क्या करूंगी। मेरे पास सब कुछ है। गांधारी ने शिव से कहा, 'मोक्ष आप कुंती और उनके पुत्रों को ही दे दीजिए।'

लेकिन कुंती नहीं मानीं उन्‍होंने कहा थोड़ा राज्य मेरे पुत्रों को भी मिलना चाहिए। इस तरह दोनों में विवाद हो गया।

जब महादेव को लगा कि इस विवाद का कोई परिणाम नहीं निकलने वाला तो उन्होंने गांधरी एवं द्रोपदी के सामने एक शर्त रखी।

जब तुम दोनों ही मानने को तैयार नहीं हो तो अब वरदान सशर्त कर देता हूं। यानी कल आप दोनों में से कोई भी सूर्य उदय से पहले हाथी पर बैठ कर एक हजार स्वर्ण कमलों से मेरा अभिषेक करेंगी तो उनके पुत्रों को राज्य और मोक्ष मिलेगा।

इस तरह गांधारी ने दुर्योधन को ये आप-बीती सुनाई तो वहीं कुंती ने अर्जुन को यह बात बताई। अर्जुन ने पांचों पांडवों को यह बात बताई और उन्होंने ऐरावत हाथी और कुबेर से स्वर्ण मुद्राओं का प्रबंध कर लिया।

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अगले दिन कुंती ऐरावत हाथी पर बैठकर और एक हजार स्वर्ण मुद्राएं लेकर मंदिर पहुंची। उन्होंने गांधारी के पहुंचने से पहले शिवलिंग का अभिषेक किया। बाद में गांधारी पहुंची लेकिन उन्हें पता चला कि कुंती पहले ही पूजा कर चुकी हैं। इस तरह कुंती के पुत्रों को राज्य और मोक्ष दोनों का ही वरदान मिल गया।

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