प्रेम विवाह नहीं है कोई पाप, फिर इतना हंगामा क्यों?Updated: Tue, 16 May 2017 10:13 AM (IST)

इसमें कन्या से बिना पूछे किसी धनवान पुरुष से विवाह कर देता है।

हिंदू धर्म में विवाह दो आत्माओं का धर्म है। हमारे पौराणिक धर्मग्रंथों में आठ तरह के विवाह बताए गए हैं। इनमें से एक है गंधर्व विवाह, जिसे वर्तमान में प्रेम विवाह कहा जा सकता है। लेकिन अमूमन देखने में आता है, प्रेम विवाह का विरोध करने वालों की तादाद काफी ज्यादा है।

पहले हम पौराणिक ग्रंथ की ओर चले तो पाएंगे कि ग्रंथों में ब्रह्म विवाह( दोनों पक्ष की सहमति से विवाह होना), दैव विवाह (किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान कन्यादान करना।), तीसरा होता है आर्श होता है। इसमें कन्या पक्ष वालों को कन्या को मूल्य दे कर विवाह करता है।

चौथा होता है प्रजापत्य विवाह इसमें कन्या से बिना पूछे किसी धनवान पुरुष से विवाह कर देता है। ऐसे विवाह जिसमें कन्या को खरीद कर विवाह किया जाता है उसे असुर विवाह कहा गया है। और राक्षस विवाह यानी कन्या के सहमति के बिन अपहरण कर उससे विवाह करना कहलाता है।

एक ओर विवाह होता है और वह होता है पैशाच विवाह इसमें कन्या के सोते समय, या मानसिक रूप से विक्षिप्त कन्या से जब कोई शारीरिक संबंध बनाता है तो यह विवाह पैशाच विवाह कहलाता है।

लेकिन, हम बात कर हैं गंधर्व विवाह (प्रेम विवाह) की इस विवाह में परिवार की सहमति के बिन वर और कन्या बिना किसी रीति-रिवाज के विवाह करते हैं।

इसका सबसे बेहतर उदाहरण दुष्यंत और शकुंतला का, जिनके पुत्र भरत के नाम पर ही भारत है। जब हमारे वैदिक सभ्यता में प्रेम विवाह का उल्लेख है तो ऐसा करने वाले लोगों पर सामाजिक अत्याचार क्यों? यह तो पूरी तरह असंगत है, क्योंकि एक तरफ तो हम अपनी हिंदू संस्कृति को मानते हैं। और इसमें मौजूद इस तरह के विवाह को सामाजिक रूप से मान लेना चाहिए।

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