Part-2: श्रीहरि के सुदर्शन चक्र पर इस राजा का था नियंत्रणUpdated: Sat, 17 Jun 2017 10:39 AM (IST)

कृत्या का वध करने के बाद सुदर्शन चक्र ऋषि दुर्वासा का पीछा करने लगा।

अब तक: इंद्र, अंबरीष का व्रत निष्फल करने के लिए ऋषि दुर्वासा को भेजते हैं लेकिन दुर्वासा समय पर नहीं पहुंचते हैं। अब आगे...

अंबरीष ने व्रत खोल लिया। इसके कुछ देर बाद ऋषि दुर्वासा आए। उन्हें जब राजा के व्रत खोलने के पता चला तो वह काफी क्रोधित हुए। उनको इतना गुस्सा आ रहा था कि उन्होंने कृत्या नाम की राक्षसी की रचना की। और उसे अंबरीष की हत्या के लिए आदेश दिया।

क्रोध के आवेश में आकर उन्होंने कृत्या राक्षसी की रचना की और उसे अंबरीश पर आक्रमण करने का निर्देश दिया। जान बचाने के लिए अंबरीश ने सुदर्शन चक्र से रक्षा की मदद मांगी। सुदर्शन चक्र के प्रहार से कृत्या राक्षसी उसी समय मारी गई।

कृत्या का वध करने के बाद सुदर्शन चक्र ऋषि दुर्वासा का पीछा करने लगा। बचाने के लिए ऋषि दुर्वासा इधर-उधर भागे लेकिन वह जहां भी जाते सुदर्शन चक्र उनके पीछे आ जाता था। वह अपनी जान बचाने के लिए इन्द्र के पास पहुंचे। इंद्र ने त्रिदेव के पास जाने को कहा।

तब विष्णु ने दुर्वासा से कहा कि सुदर्शन चक्र का नियंत्रण अंबरीश के पास है, इसलिए आप उन्हीं के पास जाएं। हार कर दुर्वासा अंबरीश के पास पहुंचे और सुदर्शन चक्र को रोकने को कहा। राजा ने ऋषि की प्रार्थना मान ली और आखिरकार सुदर्शन चक्र को रोककर दुर्वासा ऋषि की जान बचाई।

अटपटी-चटपटी

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